Tamil Nadu SIR/ नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं के नामों में “तार्किक विसंगतियों” को सार्वजनिक करने का निर्देश चुनाव आयोग (ईसीआई) को दिया है। यह निर्देश डीएमके नेता आरएस भारती की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया जिसमें आरोप लगाया गया था कि 1.7 करोड़ मतदाताओं को “तार्किक विसंगति फॉर्म” जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई को निर्देश दिया है कि वह ग्राम पंचायत भवनों, तहसील कार्यालयों और नगर क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में इन मतदाताओं के नाम प्रदर्शित करे साथ ही विसंगति के कारणों की संक्षिप्त जानकारी भी दे। प्रभावित व्यक्तियों को 10 दिनों के भीतर अपने दस्तावेज या आपत्तियां व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह ईसीआई और राज्य चुनाव आयोग को पर्याप्त कर्मचारी प्रदान करे ताकि दस्तावेजों/आपत्तियों को संभाला जा सके और प्रभावित व्यक्तियों की सुनवाई की जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह उम्मीद करता है कि ईसीआई अन्य राज्यों में भी जहां एसआईआर चल रहा है इन निर्देशों का पालन करेगा। यह मामला तमिलनाडु में मतदाता सूची से नाम हटाने के आरोपों से संबंधित है, जिसमें डीएमके ने आरोप लगाया है कि 88% मतदाताओं को नोटिस नहीं मिला है। ईसीआई ने कहा है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी है और मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी है।