Muzaffarnagar News (मुजफ्फरनगर):- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-3/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर के एक फैसले में न्यायिक व्यवस्था और मामलों की फाइलों के रिकॉल को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। 10 साल पुराने एनडीपीएस मामले में आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करते हुए न्यायाधीश ने अपनी अदालत से वापस ली गई हत्या के मामलों की 97 पत्रावलियों का भी उल्लेख किया।
रिपोर्ट के अनुसार, फैसले में न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि यदि किसी न्यायाधीश के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाला न्यायाधीश क्या ऐसे आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य है, जिन्हें वह कानून के विपरीत मानता है।
Muzaffarnagar News:- 97 हत्या के मामलों की फाइलें वापस लेने का मामला
न्यायाधीश के फैसले में कहा गया कि 18 अगस्त को तत्कालीन जनपद न्यायाधीश ने एक ही तरह के नौ आदेश पारित किए थे। इन आदेशों के माध्यम से फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में विचाराधीन हत्या के मामलों की 97 पत्रावलियों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में रिकॉल किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायाधीश दिवाकर ने खास तौर पर इस बात का उल्लेख किया कि इन फाइलों को तत्कालीन जिला जज ने अपने रिटायरमेंट से महज 13 दिन पहले वापस मंगाया था। फैसले में यह भी कहा गया कि रिकॉल के आदेशों में इसका कोई कारण नहीं बताया गया था।
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Muzaffarnagar News:- ‘पार्ट हर्ड’ मामलों को लेकर उठाया सवाल
न्यायाधीश ने अपने फैसले में आपराधिक मामलों की उन पत्रावलियों का भी जिक्र किया जिन्हें ‘पार्ट हर्ड’, यानी जिनकी सुनवाई शुरू हो चुकी हो, की श्रेणी में रखा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, फैसले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 449(2) के संदर्भ में कहा गया कि ऐसे मामलों को बिना असाधारण कानूनी कारण के बीच में वापस लेने का प्रश्न उठता है।
Muzaffarnagar News:- 10 साल पुराने NDPS केस में आरोपी बरी
यह पूरा मामला उस फैसले के दौरान सामने आया जिसमें न्यायालय ने अशोक भारत नामक आरोपी को 10 साल पुराने एनडीपीएस मामले में साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, मामले में 150 ग्राम चरस बरामदगी का आरोप था और अदालत ने पुलिस तथा अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना।
फैसले में न्यायाधीश ने लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए फिल्म दामिनी के चर्चित ‘तारीख पर तारीख’ संवाद का भी संदर्भ दिया। उनका कहना था कि एक निर्दोष व्यक्ति को न्याय पाने में लंबा समय लगा।
Muzaffarnagar News:- 155 दिनों में 10 मामलों में मृत्युदंड
रिपोर्ट के अनुसार, जज रवि कुमार दिवाकर ने 6 अप्रैल से 7 सितंबर के बीच 155 दिनों में 10 मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। ये फैसले अलग-अलग हत्या के मामलों से संबंधित थे।
97 पत्रावलियों के रिकॉल को लेकर उठे सवाल अब न्यायिक प्रशासन और संबंधित कानूनी प्रावधानों के संदर्भ में चर्चा का विषय बन गए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इन आदेशों के संबंध में संबंधित तत्कालीन जिला जज का पक्ष विस्तार से सामने नहीं आया है। इसलिए रिकॉल के कारणों और कानूनी स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।