नाबालिग अपराध (दिल्ली):- दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में एक युवती की हत्या के मामले ने नाबालिगों से जुड़े अपराध और बच्चों के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के अनुसार, मामले में चार आरोपियों को पकड़ा गया है, जिनमें तीन नाबालिग बताए गए हैं। पुलिस जांच के मुताबिक, पीड़िता 10 सितंबर को एक परिचित युवक से मिलने पहुंची थी। इसके बाद उस युवक ने अपने कुछ दोस्तों को बुलाया। कुछ दिनों बाद पुलिस को युवती का शव मिला। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कई CCTV फुटेज खंगाले और संदिग्धों तक पहुंची।
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान 50 से अधिक CCTV कैमरों के फुटेज की पड़ताल की गई। एक टेंपो की गतिविधियां जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बनीं और उसके जरिए संदिग्धों तक पहुंचने में मदद मिली। पुलिस ने एक 19 वर्षीय आरोपी के साथ तीन नाबालिगों को पकड़े जाने की जानकारी दी है। मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।
नाबालिग अपराध:- चार में से तीन आरोपी नाबालिग होने से चिंता क्यों?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आरोपियों की उम्र है। तीन आरोपियों के नाबालिग होने की जानकारी सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि किशोरों में गंभीर हिंसक व्यवहार के पीछे कौन-कौन से सामाजिक और पारिवारिक कारण काम करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरों के व्यवहार पर परिवार, दोस्त, सामाजिक वातावरण, आर्थिक परिस्थितियां और ऑनलाइन गतिविधियों का प्रभाव पड़ सकता है। मनोवैज्ञानिक डॉ. रोमा कुमार ने अपराधी प्रवृत्ति वाले साथियों के दबाव, पहचान बनाने की इच्छा और कठिन सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों जैसे संभावित कारकों का उल्लेख किया है। हालांकि, किसी एक कारण को हर नाबालिग अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
ऑनलाइन कंटेंट और सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर भी बहस होती रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, हिंसक या अनुचित सामग्री तक कम उम्र में पहुंच बच्चों के व्यवहार और सोच को प्रभावित कर सकती है, लेकिन केवल ऑनलाइन सामग्री को अपराध का प्रत्यक्ष कारण मानना पर्याप्त नहीं है। हर मामले में पारिवारिक वातावरण, साथियों का प्रभाव, मानसिक-सामाजिक परिस्थितियां और व्यक्तिगत परिस्थितियों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
नाबालिग अपराध:- POCSO मामलों में परिचित लोगों की भूमिका
NCRB की 2024 की रिपोर्ट के हवाले से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्चों के खिलाफ POCSO के तहत दर्ज ‘penetrative sexual assault’ मामलों में 96.6 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चे का पहले से परिचित था। यह आंकड़ा इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा केवल अजनबियों से सुरक्षा तक सीमित नहीं है।
ऐसे मामलों में बच्चों को सुरक्षित वातावरण, भरोसेमंद वयस्कों तक पहुंच और समय पर सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। साथ ही, गंभीर अपराधों में कानून अपना काम करता है और आरोपों तथा दोषसिद्धि के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
स्वरूप नगर मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया से घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। इस घटना ने एक बार फिर किशोरों की सुरक्षा, डिजिटल वातावरण, परिवार और समाज की जिम्मेदारी तथा बच्चों के बीच हिंसा रोकने के उपायों पर चर्चा को सामने ला दिया है।