Houthi rebels: मिडिल ईस्ट में फिर भड़की आग, हूती की बढ़त से US-सऊदी गठजोड़ पर सवाल

Houthi rebels: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय संकट को एक नए मोड़ पर पहुंचा दिया है। रेड सी क्षेत्र में हूती की हालिया बढ़त ने अमेरिका, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के सामने सुरक्षा और कूटनीति से जुड़ी चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

Houthi rebels: रेड सी में बढ़ा हूती का दबदबा

हूती लड़ाकों ने यमन के कुछ महत्वपूर्ण तटीय इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत की है। रिपोर्ट के मुताबिक, समूह की नजर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर भी हो सकती है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है।

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अगर इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल की सप्लाई पर इसका असर पड़ सकता है।

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Houthi rebels: अमेरिका का साफ संदेश- सीधे हमले से दूरी

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। अमेरिकी प्रशासन फिलहाल हूती ठिकानों पर सीधे आक्रामक सैन्य हमले करने से बच रहा है। इसके बजाय वॉशिंगटन सऊदी अरब को खुफिया जानकारी और टारगेटिंग से जुड़ी सहायता दे रहा है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल अमेरिकी नीति में हूती के खिलाफ प्रत्यक्ष आक्रामक हमले शामिल नहीं हैं।

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Houthi rebels: ट्रंप के बयान से बढ़ी क्षेत्रीय हलचल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने भी क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच सवाल खड़े किए हैं। ट्रंप ने कहा है कि हूती अमेरिका के साथ लड़ना नहीं चाहते और अमेरिका को उनके खिलाफ कार्रवाई में शामिल करने की इच्छा नहीं रखते।

उनके रुख से यह संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन हूती-सऊदी संघर्ष में सीधे सैन्य रूप से उतरने के बजाय सऊदी अरब से खुद स्थिति संभालने की अपेक्षा कर रहा है।

Houthi rebels: सऊदी अरब के सामने बड़ी सैन्य चुनौती

सऊदी अरब लंबे समय से यमन की सरकार समर्थित सेनाओं को सैन्य और अन्य सहायता देता रहा है। इसके बावजूद हूती कई इलाकों में आगे बढ़ने में सफल हुए हैं।

अमेरिकी और क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, यमनी सरकारी बलों की कमजोरियां पहले से ज्ञात थीं। हूती ने भी पिछले कई महीनों में अपने अभियान की तैयारी की थी।

Houthi rebels: ईरान कनेक्शन ने बढ़ाई चिंता

हूती और ईरान के बीच संबंध भी मौजूदा संकट का अहम हिस्सा हैं। हूती को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से प्रशिक्षण और अन्य सहायता मिलने की बात लंबे समय से सामने आती रही है।

हालांकि, क्षेत्रीय विशेषज्ञों के अनुसार हूती पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में काम करने वाला संगठन नहीं है और उसके अपने स्थानीय एवं क्षेत्रीय हित भी हैं।

Houthi rebels: होर्मुज पर बातचीत भी हुई प्रभावित

यमन में बढ़ते संघर्ष का असर क्षेत्रीय कूटनीति पर भी दिखाई दे रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रही बातचीत और खाड़ी देशों तथा ईरान के बीच संबंधों पर हूती गतिविधियों का प्रभाव पड़ रहा है।

सऊदी अरब की चिंता यह है कि जब एक तरफ हूती हमले जारी हैं, तब ईरान के साथ व्यापक सुरक्षा समझौते की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है।

Houthi rebels: तेल और वैश्विक व्यापार पर भी खतरा

रेड सी और बाब-अल-मंदेब में अस्थिरता सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है। यह वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकती है।

सऊदी अरब पहले से ही ऊर्जा बुनियादी ढांचे, तेल परिवहन और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। हूती दबाव बढ़ने से इन चुनौतियों का दायरा और बड़ा हो सकता है।

Houthi rebels: क्या सैन्य कार्रवाई से निकलेगा समाधान?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हूती समस्या का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई के जरिए संभव है। वर्षों से चले सैन्य अभियानों के बावजूद हूती अपनी प्रभावी सैन्य क्षमता बनाए रखने में सफल रहे हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका, सऊदी अरब, यमन, ईरान और हूती समूह के फैसले बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इन फैसलों का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट की सुरक्षा पर नहीं, बल्कि रेड सी शिपिंग, तेल की सप्लाई और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

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