Kirti Vardhan Singh: अमेरिका के दबाव में आएगा भारत? विदेश राज्य मंत्री ने दिया चौंकाने वाला बयान

 

Kirti Vardhan Singh (लखनऊ):- अमेरिका द्वारा रूस और ईरान पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल को कानून बनाए जाने के बाद भारत की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत किसी भी विदेशी दबाव में नहीं आएगा और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा।केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने शनिवार को लखनऊ में ANI से बातचीत में कहा कि भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 140 करोड़ भारतीय हैं।

Kirti Vardhan Singh: केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?

मंत्री सिंह ने कहा, “भारत देश और हमारी सरकार की प्राथमिकता हमारे लोग हैं, हमारे 140 करोड़ लोग हैं। हम अपने लोगों की सुविधा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे। हम अपने देश की मजबूती और स्थिरता के लिए, हमारे 140 करोड़ की आबादी के लिए हर मजबूत कदम उठाएंगे। हमारी अपनी स्वतंत्र विदेश नीति है। हम किसी देश के कहने पर नहीं चलेंगे कि हमारा देश क्या कर रहा है। हम वही करेंगे जो हमारे देश के लिए अच्छा होगा।”उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ को अनुचित करार दिया और कहा कि नई दिल्ली किसी भी देश के दबाव में काम नहीं कर रही है।

Kirti Vardhan Singh: क्या है ट्रंप का नया कानून?

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार 18 सितंबर को “Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026” पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया है। यह बिल अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा लाया गया था।

इस नए कानून के तहत रूस और ईरान पर पहले से लगे प्रतिबंधों को और बढ़ा दिया गया है। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार मिल गया है कि वे उन देशों से आयात होने वाले सामानों पर 100 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा सकते हैं, जो रूसी कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं या प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।

हालांकि, इस कानून का मतलब यह नहीं है कि भारत या किसी अन्य देश पर अपने आप 100 प्रतिशत टैरिफ लग गया है। यह सिर्फ राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की कानूनी शक्ति देता है। अंतिम फैसला राष्ट्रपति को ही लेना है।

Kirti Vardhan Singh: भारत पर क्यों पड़ेगा असर?

यह कानून भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया में रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रियायती दरों पर रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदा है, ताकि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रहें।अमेरिका लगातार भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है। इसी को लेकर ट्रंप प्रशासन ने पहले भी भारत पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी थी।

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Kirti Vardhan Singh: भारत की ऊर्जा नीति क्या है?

विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर पहले भी कहा था कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को कई देशों से पूरा करता है और बाजार और राष्ट्रीय हित के आधार पर फैसले लेता है। मंत्रालय ने कहा था कि इस बिल के संभावित प्रभावों पर अमेरिका के साथ उच्च स्तर पर कई महीनों से चर्चा की गई है।

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