Election Commission: ‘जनता के संदेह दूर होने चाहिए’, BRS नेता वी. श्रीनिवास गौड़ ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

Election Commission (नई दिल्ली): चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस के बीच भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता वी. श्रीनिवास गौड़ ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर जनता के मन में जो संदेह पैदा हुए हैं, उन्हें स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति साफ करने की मांग की।

श्रीनिवास गौड़ की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेष रूप से मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR और आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। 2 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई समेत कई स्थानों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन भी आयोजित किए गए।

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर बहस

BRS नेता का कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर किसी भी तरह का संदेह लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर विषय बन सकता है। उन्होंने जनता के बीच उठ रहे सवालों का स्पष्टीकरण दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

यह मुद्दा पिछले कुछ दिनों में इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर मीडिया रिपोर्ट सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन खबरों को अलग तरीके से स्पष्ट किया है।

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Election Commission: आयोग ने आंतरिक मतभेद के दावे पर दिया स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, किसी मुद्दे पर सवाल उठाना या सुझाव देना अपने आप में औपचारिक असहमति नहीं माना जा सकता। आयोग ने यह भी कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करता है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों की ओर से SIR से जुड़े मामलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। दूसरी ओर, आयोग के सूत्रों ने कहा है कि अंतिम फैसलों के खिलाफ किसी चुनाव आयुक्त ने औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई और संबंधित आदेशों पर आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर हैं।

विपक्षी दल लगातार उठा रहे सवाल

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर BRS के अलावा अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी अलग-अलग मौकों पर सवाल उठाए हैं। BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव ने सितंबर में आयोग से जुड़े विवादों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि संवैधानिक संस्था के रूप में चुनाव आयोग को संदेह से ऊपर रहना चाहिए।

वहीं, चुनाव आयोग ने अपनी ओर से आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। ऐसे में मौजूदा विवाद में एक ओर विपक्षी नेताओं द्वारा उठाए जा रहे सवाल हैं और दूसरी ओर आयोग का आधिकारिक स्पष्टीकरण है।

श्रीनिवास गौड़ की ताजा टिप्पणी इसी व्यापक राजनीतिक बहस के बीच सामने आई है। आने वाले समय में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची संशोधन और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच चर्चा जारी रहने की संभावना है।

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