Health Ministry नई दिल्ली:- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए नियमों में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत कॉर्निया प्रत्यारोपण केंद्रों में क्लिनिकल स्पेक्युलर माइक्रोस्कोपी की अनिवार्य आवश्यकता को हटा दिया गया है।
इस संशोधन का उद्देश्य छोटे आंख केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं को बढ़ावा देना है। इससे कॉर्निया प्रत्यारोपण की उपलब्धता और पहुंच में सुधार होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस संशोधन से कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और कॉर्निया ब्लाइंडनेस के मामलों में कमी आएगी।
कॉर्निया प्रत्यारोपण एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें दान किए गए कॉर्निया को रोगी की आंख में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह प्रक्रिया कॉर्निया की क्षति या रोग के कारण दृष्टि में कमी को दूर करने में मदद करती है। भारत में कॉर्निया ब्लाइंडनेस एक प्रमुख समस्या है जिससे लगभग 1.2 मिलियन लोग प्रभावित हैं। इस संशोधन से कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं की उपलब्धता और पहुंच में सुधार होगा जिससे कॉर्निया ब्लाइंडनेस के मामलों में कमी आएगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संशोधन को राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम (एनओटीपी) के तहत लागू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अंग प्रत्यारोपण सेवाओं को बढ़ावा देना और अंग दान को प्रोत्साहित करना है। इस संशोधन से कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और कॉर्निया ब्लाइंडनेस के मामलों में कमी आएगी। इससे लोगों को बेहतर दृष्टि और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।