जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोकने के लिए साजिश रची गई थी। गहलोत के इस बयान ने एक बार फिर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और उस दौर की घटनाओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
एक बातचीत के दौरान गहलोत ने कहा कि यदि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव देतीं, तो उनके लिए उसे ठुकराना संभव नहीं था। उन्होंने कहा, “अगर सोनिया गांधी प्रस्ताव दें, तो क्या मैं मना कर देता?” गहलोत का यह बयान उस समय की परिस्थितियों की ओर इशारा करता है, जब कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम की सबसे ज्यादा चर्चा थी।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के दौरान अशोक गहलोत को पार्टी नेतृत्व की पहली पसंद माना जा रहा था। हालांकि, राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उत्पन्न राजनीतिक घटनाक्रम के बाद परिस्थितियां बदल गईं और अंततः गहलोत अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गए। बाद में पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
गहलोत ने संकेत दिए कि उस समय कुछ लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से ऐसा माहौल बनाया जिससे उनका कांग्रेस अध्यक्ष बनना संभव नहीं हो सका। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लेकर सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का यह बयान राजस्थान कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे नेतृत्व विवाद और उनके तथा सचिन पायलट के बीच राजनीतिक मतभेदों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस आगामी चुनावी रणनीतियों को लेकर संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है।
गहलोत के इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर नई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अशोक गहलोत के इस खुलासे से कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के दौरान हुई अंदरूनी गतिविधियों और शक्ति संतुलन को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो सकती है।