नई दिल्ली। गर्भपात (मिसकैरिज) के बाद महिलाओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इसके बाद गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। इस विषय को लेकर कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका जवाब पूरी तरह हां या ना में नहीं दिया जा सकता।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के अनुसार, मिसकैरिज के बाद महिला का शरीर कुछ समय में सामान्य स्थिति में लौट आता है और कई मामलों में प्रजनन क्षमता पर कोई स्थायी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। यही कारण है कि कुछ महिलाओं को गर्भपात के बाद अपेक्षाकृत जल्दी गर्भधारण हो जाता है। हालांकि इसे सीधे तौर पर फर्टिलिटी बढ़ जाना नहीं कहा जा सकता।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि गर्भपात किसी गंभीर चिकित्सीय समस्या के कारण नहीं हुआ है, तो शरीर के स्वस्थ होने के बाद महिला की गर्भधारण क्षमता पहले जैसी ही बनी रह सकती है। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि गर्भपात के कुछ महीनों के भीतर गर्भधारण करने वाली महिलाओं के परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं, लेकिन यह हर महिला पर समान रूप से लागू नहीं होता।
डॉक्टरों का कहना है कि मिसकैरिज के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रिकवरी है। गर्भपात का अनुभव कई महिलाओं के लिए भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए अगली गर्भावस्था की योजना बनाने से पहले चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि किसी महिला को बार-बार गर्भपात की समस्या हो रही है, तो इसके पीछे के कारणों की विस्तृत जांच करानी चाहिए। हार्मोनल असंतुलन, आनुवंशिक कारण, संक्रमण, गर्भाशय संबंधी समस्याएं या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, एक बार मिसकैरिज होने का अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में स्वस्थ गर्भावस्था संभव नहीं होगी। अधिकांश महिलाएं बाद में सफलतापूर्वक स्वस्थ शिशु को जन्म देती हैं। इसलिए किसी भी भ्रम या चिंता की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि मिसकैरिज के बाद फर्टिलिटी अपने आप बढ़ जाती है, ऐसा मानना पूरी तरह सही नहीं है। हालांकि, कई महिलाओं में प्रजनन क्षमता सामान्य बनी रहती है और उचित देखभाल तथा चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ स्वस्थ गर्भावस्था की संभावना अच्छी रहती है।