नई दिल्ली। हर साल 25 जून को World Vitiligo Day मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य सफेद दाग (विटिलिगो) के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और इससे जुड़े भ्रमों को दूर करना है। आज भी समाज में इस बीमारी को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं, जिनमें सबसे आम मिथक यह है कि सफेद दाग छूने से फैलता है।
क्या छूने से फैलता है सफेद दाग?
विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद दाग बिल्कुल भी संक्रामक बीमारी नहीं है। यह किसी व्यक्ति को छूने, साथ बैठने, खाना खाने, हाथ मिलाने या कपड़े साझा करने से नहीं फैलता। इसलिए विटिलिगो से पीड़ित लोगों से दूरी बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
आखिर क्या है विटिलिगो?
विटिलिगो एक त्वचा संबंधी स्थिति है, जिसमें त्वचा को रंग देने वाली कोशिकाएं (मेलानोसाइट्स) काम करना बंद कर देती हैं या नष्ट हो जाती हैं। इसके कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं।
सफेद दाग से जुड़े आम मिथक
मिथक 1: यह छूने से फैलता है।
सच्चाई: यह पूरी तरह गलत है। विटिलिगो संक्रामक नहीं है।
मिथक 2: यह खराब खानपान की वजह से होता है।
सच्चाई: इसका सीधा संबंध किसी विशेष भोजन से नहीं माना जाता।
मिथक 3: सफेद दाग वाले लोग सामान्य जीवन नहीं जी सकते।
सच्चाई: विटिलिगो का व्यक्ति की बुद्धिमत्ता, क्षमता या कार्यक्षमता से कोई संबंध नहीं है।
मिथक 4: इसका कोई इलाज नहीं है।
सच्चाई: कई मामलों में दवाओं, फोटोथेरेपी और अन्य चिकित्सकीय उपचारों से स्थिति में सुधार संभव है।
मरीजों को किस बात का रखना चाहिए ध्यान?
- त्वचा को तेज धूप से बचाएं।
- चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार जारी रखें।
- मानसिक तनाव कम करने का प्रयास करें।
- समाज में फैली गलत धारणाओं से प्रभावित न हों।
जागरूकता है सबसे बड़ा इलाज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि विटिलिगो से अधिक नुकसान बीमारी नहीं, बल्कि उससे जुड़ा सामाजिक भेदभाव और गलतफहमियां पहुंचाती हैं। इसलिए लोगों को यह समझना जरूरी है कि सफेद दाग कोई छूत की बीमारी नहीं है और इससे पीड़ित व्यक्ति के साथ सामान्य व्यवहार किया जाना चाहिए।
World Vitiligo Day का संदेश यही है कि विटिलिगो के प्रति जागरूकता बढ़े, भेदभाव कम हो और प्रभावित लोगों को सम्मान व समर्थन मिले।