नई दिल्ली :- देशभर के लाखों घर खरीदारों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी बिल्डर ने तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया, तो खरीदार कब्जा लेने के बाद भी मुआवजे और राहत की मांग कर सकता है। अदालत ने कहा कि केवल फ्लैट का कब्जा स्वीकार कर लेने से उपभोक्ता के कानूनी अधिकार समाप्त नहीं हो जाते।
शीर्ष अदालत ने इस मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कब्जा मिलने के बाद शिकायत के अधिकार को सीमित माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि बिल्डर की देरी से खरीदार को आर्थिक या मानसिक नुकसान हुआ है, तो वह उपभोक्ता आयोग में न्याय पाने का अधिकार रखता है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बिल्डर की सेवा में कमी (Deficiency in Service) का मामला केवल इसलिए खत्म नहीं हो जाता क्योंकि खरीदार ने अंततः फ्लैट का कब्जा ले लिया। वर्षों की देरी से लोगों को आर्थिक बोझ, किराया और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है, जिसके लिए वे उचित मुआवजे की मांग कर सकते हैं।
इस फैसले को रियल एस्टेट क्षेत्र में उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बिल्डरों की जवाबदेही बढ़ेगी और समय पर परियोजनाएं पूरी करने का दबाव भी बढ़ेगा। साथ ही, यह फैसला उन हजारों खरीदारों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्होंने लंबे इंतजार के बाद फ्लैट का कब्जा तो ले लिया, लेकिन देरी के कारण भारी नुकसान उठाया।