नई दिल्ली :- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने नए सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के पावरहेड का सफल हॉट टेस्ट पूरा कर लिया है। इस परीक्षण के दौरान इंजन ने अपने निर्धारित लक्ष्य का करीब 88% थ्रस्ट (शक्ति) हासिल किया, जिसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इस हॉट टेस्ट का उद्देश्य इंजन के प्रमुख हिस्सों, विशेष रूप से गैस जनरेटर, टर्बोपंप और प्री-बर्न सिस्टम के प्रदर्शन का परीक्षण करना था। परीक्षण के नतीजे उम्मीद के अनुरूप रहे और वैज्ञानिकों को इंजन के व्यवहार से जुड़ा महत्वपूर्ण तकनीकी डेटा प्राप्त हुआ।
ISRO का यह सेमी-क्रायोजेनिक इंजन भविष्य में एलवीएम-3 (LVM3) जैसे भारी प्रक्षेपण यानों की क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। यह इंजन लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) और केरोसीन (RP-1/Kerosene) ईंधन का उपयोग करता है, जिससे अधिक थ्रस्ट, बेहतर दक्षता और कम लागत पर भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजना संभव होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफलता भारत के स्वदेशी लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम को नई मजबूती देगी। आने वाले समय में पूर्ण इंजन परीक्षण और एकीकृत परीक्षणों के बाद इस तकनीक को भविष्य के प्रक्षेपण मिशनों में शामिल किए जाने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। ISRO की यह उपलब्धि भारत को उन्नत रॉकेट प्रणोदन तकनीक वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।