यांगून: म्यांमार के तट के पास बंगाल की खाड़ी में हुए एक भीषण समुद्री हादसे में 500 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों के मारे जाने की आशंका जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों UNHCR और IOM के अनुसार, हाल के दिनों में रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर जा रही दो नावें समुद्र में डूब गईं, जिससे यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी समुद्री त्रासदियों में से एक बन सकती है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों नावें म्यांमार के रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। इनमें सवार अधिकांश लोग रोहिंग्या समुदाय के थे, जबकि कुछ यात्री बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविरों से भी बताए जा रहे हैं। ये लोग बेहतर सुरक्षा और जीवन की तलाश में मलेशिया, इंडोनेशिया या अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर जा रहे थे।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, एक नाव से जून के अंत में संपर्क टूट गया था, जबकि दूसरी नाव 8 जुलाई के आसपास म्यांमार के तट के निकट डूब गई। अब तक बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना है और आशंका है कि अधिकांश यात्री समुद्र में डूब गए। हालांकि, मृतकों की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी आज दुनिया के सबसे खतरनाक शरणार्थी समुद्री मार्गों में शामिल हैं। एजेंसियों ने क्षेत्रीय देशों से खोज एवं बचाव अभियान तेज करने, शरणार्थियों को मानवीय सहायता उपलब्ध कराने और मानव तस्करी पर सख्ती से कार्रवाई करने की अपील की है।
रोहिंग्या समुदाय वर्षों से म्यांमार में हिंसा, उत्पीड़न और विस्थापन का सामना कर रहा है। इसी कारण हजारों लोग हर वर्ष खतरनाक समुद्री यात्रा कर दूसरे देशों में शरण लेने का प्रयास करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार में जारी संघर्ष, बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में कठिन परिस्थितियां और सीमित मानवीय सहायता लोगों को ऐसे जोखिम भरे सफर के लिए मजबूर कर रही हैं।
यह हादसा एक बार फिर वैश्विक समुदाय के सामने रोहिंग्या शरणार्थी संकट की गंभीरता को उजागर करता है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी संबंधित देशों से अपील की है कि वे मानवीय आधार पर सहयोग बढ़ाएं और ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।