भिलवल। क्षेत्र के चर्चित समाजसेवी एवं संभावित ग्राम प्रधान प्रत्याशी राकेश को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद पूरे इलाके में मामला चर्चा का विषय बन गया है। घटना को लेकर पुलिस, स्थानीय लोगों और स्वयं राकेश प्रधान के अलग-अलग दावे सामने आने से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार शुक्रवार दोपहर राकेश की खाद एवं बीज भंडार की दुकान पर एक अज्ञात व्यक्ति खेतों में उपयोग होने वाली दवाओं की खरीदारी करने पहुंचा। उसने लगभग ₹1,900 की खरीदारी की, लेकिन भुगतान के समय उसके पास पर्याप्त नकदी नहीं थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वह व्यक्ति अपना बैग दुकान पर छोड़कर यह कहकर चला गया कि वह एटीएम से पैसे निकालकर तुरंत लौटेगा।
इसी दौरान कुछ समय बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुकान पर रखा बैग खोलकर देखा तो उसमें कथित रूप से अफीम जैसे मादक पदार्थ बरामद होने का दावा किया। इसके बाद पुलिस ने राकेश प्रधान को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।
पुलिस का कहना है कि संदिग्ध मादक पदार्थ दुकान से बरामद हुए हैं। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
वहीं दूसरी ओर स्थानीय व्यापारियों, ग्रामीणों और समर्थकों का कहना है कि राकेश लंबे समय से समाजसेवा और कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं तथा उनके खिलाफ पहले कभी किसी प्रकार का आपराधिक आरोप सामने नहीं आया। लोगों का आरोप है कि ग्राम प्रधान चुनाव नजदीक होने के कारण उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने का प्रयास किया गया हो सकता है।
राकेश ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि किसी अज्ञात व्यक्ति ने योजनाबद्ध तरीके से बैग दुकान पर छोड़ा है, तो इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना किसी भी दुकानदार के साथ हो सकती है।
घटना के बाद क्षेत्र में लोगों की भीड़ एकत्र हो गई और कई लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। कुर्मी समाज के कई लोगों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है। समाज के कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने पर विचार करेंगे।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राकेश प्रधान वास्तव में किसी अपराध में शामिल हैं, या फिर वह किसी सुनियोजित साजिश का शिकार हुए हैं? इसका जवाब केवल निष्पक्ष पुलिस जांच, वैज्ञानिक साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आ सकेगा। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।