नई दिल्ली। भारत सरकार ने भारत-चीन-भूटान ट्राई-जंक्शन के निकट रणनीतिक संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के उत्तर बंगाल क्षेत्र में खुनिया मोड़ (चालसा) से जलढाका तक 17 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन के निर्माण को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर लगभग 272 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों तक तेज़ पहुंच सुनिश्चित करना, रणनीतिक क्षमता बढ़ाना और डुआर्स क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना है।
यह नई रेलवे लाइन जलपाईगुड़ी और कालिम्पोंग के वन क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। परियोजना के लिए मानसून के बाद भारतीय रेलवे और पश्चिम बंगाल वन विभाग संयुक्त रूप से सर्वेक्षण करेंगे, जिसके आधार पर अंतिम रेल मार्ग तय किया जाएगा।
इस क्षेत्र का सामरिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि भारत-चीन-भूटान ट्राई-जंक्शन के निकट स्थित डोकलाम क्षेत्र में वर्ष 2017 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लंबा सैन्य गतिरोध हुआ था। ऐसे में इस इलाके तक बेहतर रेल संपर्क को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेल संपर्क बढ़ने से जलढाका, बिंदू और तोदे-टांगटा जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों तक आवागमन आसान होगा। इसके साथ ही डुआर्स के प्राकृतिक पर्यटन, चाय बागानों और वन्यजीव क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की भी उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में सड़क के साथ रेल नेटवर्क का विस्तार आपदा प्रबंधन, सैन्य रसद और स्थानीय विकास—तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह परियोजना उत्तर बंगाल में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है।