National Household Travel Survey (नई दिल्ली): भारत में लोग शिक्षा और रोजगार के लिए किस तरह और कितनी देर तक सफर करते हैं, इसे लेकर पहली बार व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे सामने आया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच पहला National Household Travel Survey (NHTS) किया। इसमें देश के 14,274 गांवों और 10,377 शहरी ब्लॉकों के 4,92,023 परिवारों तथा 20,34,371 लोगों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई।
सर्वे के मुताबिक 15 से 29 वर्ष की उम्र के छात्रों में शैक्षणिक संस्थानों तक नियमित आने-जाने की हिस्सेदारी काफी अधिक है। इस आयु वर्ग में ग्रामीण क्षेत्रों में 79.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 73.3 प्रतिशत छात्र रोजाना शिक्षा के लिए यात्रा करते हैं। कुल मिलाकर 15-29 वर्ष के छात्रों में नियमित शैक्षणिक आवागमन की भागीदारी करीब 77 प्रतिशत दर्ज की गई।
National Household Travel Survey: पढ़ाई के लिए पैदल चलना सबसे आम साधन
छात्रों की आवाजाही में पैदल चलना सबसे प्रमुख माध्यम है। देशभर में शैक्षणिक संस्थानों तक जाने वाले छात्रों में 37 प्रतिशत पैदल सफर करते हैं। इसके बाद 29.5 प्रतिशत छात्र बस और 15.8 प्रतिशत साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। ऑटो-रिक्शा से सफर करने वाले छात्रों की हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत रही, जबकि दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल 6.7 प्रतिशत छात्रों ने किया।
सर्वे यह भी बताता है कि अधिकांश छात्रों का सफर बहुत लंबा नहीं है। करीब 87.6 प्रतिशत छात्र 30 मिनट के भीतर अपने शैक्षणिक संस्थान पहुंच जाते हैं। छात्रों के लिए औसत यात्रा समय लगभग 23 मिनट दर्ज किया गया। शहरी छात्रों का औसत मासिक आवागमन खर्च 617 रुपये, जबकि ग्रामीण छात्रों का खर्च 361 रुपये रहा।
National Household Travel Survey: कामगारों में दोपहिया वाहनों का दबदबा
रोजगार के लिए आने-जाने वालों की बात करें तो दोपहिया वाहन सबसे प्रमुख साधन बनकर सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार 42.6 प्रतिशत कामगार अपने कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 37.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 52.3 प्रतिशत है।
काम पर जाने वाले 83.4 प्रतिशत लोग 30 मिनट के भीतर अपने स्थायी कार्यस्थल पहुंच जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 86.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 79.3 प्रतिशत है। कामगारों का औसत यात्रा समय 25 मिनट रहा, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 27 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 23 मिनट दर्ज किया गया।
National Household Travel Survey: शहरों में यात्रा पर ज्यादा खर्च
कार्यस्थल तक आने-जाने का औसत मासिक खर्च 785 रुपये पाया गया। शहरी कामगारों का औसत खर्च 1,044 रुपये और ग्रामीण कामगारों का 612 रुपये रहा। इसके अलावा करीब 95 प्रतिशत कामगार सुबह 10 बजे से पहले काम के लिए निकल जाते हैं, जिससे सुबह के समय सड़कों और सार्वजनिक परिवहन पर दबाव बढ़ता है।
सर्वे के आंकड़े भारत में शिक्षा और रोजगार से जुड़ी यात्रा की तस्वीर को समझने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। सरकार के मुताबिक इन आंकड़ों का इस्तेमाल परिवहन व्यवस्था की कमियों की पहचान, रूट और सेवा की बेहतर योजना तथा भविष्य में परिवहन बुनियादी ढांचे से जुड़ी नीतियां तैयार करने में किया जा सकता है।