Red Sea Crisis (नई दिल्ली):- लाल सागर में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम मोखा पोर्ट पर कब्जा कर लिया है। सैन्य सूत्रों और चश्मदीदों के हवाले से सामने आई इस खबर ने सऊदी अरब समेत पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि मोखा बंदरगाह पर अब तक सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों का नियंत्रण था। ऐसे में हूतियों का यहां कब्जा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
मोखा पोर्ट लाल सागर के तट पर स्थित है और इसकी रणनीतिक अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक के बेहद करीब है। मोखा पर नियंत्रण मिलने के बाद हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 किलोमीटर दूर रह गए हैं। बाब अल-मंदेब एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। इस रास्ते से हर दिन बड़ी संख्या में मालवाहक और तेल टैंकर गुजरते हैं।
Red Sea Crisis: मोखा पर कब्जे से क्यों बढ़ी सऊदी की चिंता?
मोखा पर हूतियों का कब्जा सऊदी अरब के लिए इसलिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि सऊदी समर्थित सरकारी बल लंबे समय से यमन में हूतियों के प्रभाव को रोकने की कोशिश करते रहे हैं। अब रणनीतिक बंदरगाह पर हूतियों की मौजूदगी उनके प्रभाव क्षेत्र को और मजबूत कर सकती है।
हूतियों की ओर से हालांकि दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए कोई खतरा नहीं है। लेकिन इसके साथ ही समूह ने सऊदी अरब के जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दोहराई है। यही बयान आने वाले दिनों में लाल सागर के समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बढ़ा सकता है।
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हूतियों और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से तनाव चला आ रहा है। यमन के गृहयुद्ध में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया है। लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने पहले भी वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा को प्रभावित किया है।
Red Sea Crisis: बाब अल-मंदेब के करीब पहुंचना कितना अहम?
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। इसके जरिए एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है। इसलिए इसके आसपास किसी भी सशस्त्र समूह की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से देखा जाता है।
मोखा पर कब्जे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हूती अब अपने प्रभाव को बाब अल-मंदेब की दिशा में और बढ़ाने की कोशिश करेंगे। यदि ऐसा होता है तो लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा, सऊदी अरब की समुद्री गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल हूतियों के इस कदम ने यमन के संघर्ष को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। मोखा पोर्ट पर कब्जा सिर्फ एक बंदरगाह पर नियंत्रण की घटना नहीं है, बल्कि यह लाल सागर और बाब अल-मंदेब के आसपास बदलते क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है।