Trump F-35 Deal (नई दिल्ली):- अमेरिका ने सऊदी अरब को अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री का रास्ता साफ कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने करीब 24.3 अरब डॉलर यानी लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये के संभावित सौदे को मंजूरी दी है। हालांकि, यह डील अभी पूरी तरह अंतिम नहीं हुई है और इसे अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित सौदे में 48 F-35 लड़ाकू विमान और 49 इंजन के साथ संचार उपकरण, स्पेयर पार्ट्स और अन्य सहायता शामिल है। F-35 को स्टील्थ तकनीक से लैस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है। वर्तमान में मध्य-पूर्व में इजरायल F-35 का संचालन करने वाला देश है।
Trump F-35 Deal:- चीन से जुड़े सुरक्षा जोखिम पर अमेरिकी चिंता
सऊदी अरब को F-35 देने की योजना के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के भीतर संभावित सुरक्षा जोखिम को लेकर चिंता सामने आई है। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि कुछ आंतरिक आकलनों में आशंका जताई गई है कि चीन जासूसी या सऊदी अरब के साथ सैन्य एवं सुरक्षा सहयोग के माध्यम से F-35 से जुड़ी संवेदनशील तकनीक तक पहुंच हासिल करने की कोशिश कर सकता है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से F-35 की उन्नत रडार और निगरानी तकनीक की सुरक्षा को लेकर चिंता का उल्लेख है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, संबंधित साइटों पर केवल अमेरिकी और सऊदी अधिकारियों तथा अधिकृत ठेकेदारों की पहुंच सुनिश्चित करने जैसे सुरक्षा उपायों पर विचार किया गया है।
Trump F-35 Deal:- सऊदी अरब और चीन के बढ़ते रक्षा संबंध
अमेरिकी चिंता की पृष्ठभूमि में सऊदी अरब और चीन के बीच बढ़ते रक्षा एवं तकनीकी संबंध भी चर्चा में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब चीन से बैलिस्टिक मिसाइलों और सैन्य ड्रोन समेत कुछ रक्षा प्रणालियां खरीदता रहा है। साथ ही सऊदी बुनियादी ढांचे में चीनी तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी अमेरिकी अधिकारियों ने सवाल उठाए हैं।
इसी वजह से अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि F-35 से जुड़ी संवेदनशील तकनीक वाले ठिकानों को चीनी सैन्य या खुफिया गतिविधियों से किस तरह सुरक्षित रखा जाएगा। यह चिंता अभी अमेरिकी अधिकारियों के आकलन के रूप में सामने आई है, न कि इस बात की पुष्टि के रूप में कि चीन ने F-35 तकनीक हासिल की है।
Trump F-35 Deal:- इजरायल की सैन्य बढ़त भी अहम मुद्दा
इस सौदे का एक महत्वपूर्ण पहलू मध्य-पूर्व में इजरायल की सैन्य बढ़त से जुड़ा है। अमेरिकी नीति लंबे समय से यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती रही है कि क्षेत्र में इजरायल की ‘क्वालिटेटिव मिलिट्री एज’ बनी रहे। सऊदी अरब को F-35 देने से इसी नीति को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।
अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि प्रस्तावित बिक्री क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और सऊदी अरब के साथ अमेरिकी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। दूसरी ओर, कांग्रेस में इस सौदे की समीक्षा के दौरान सुरक्षा और अन्य नीतिगत मुद्दों पर सवाल उठ सकते हैं।
फिलहाल प्रस्तावित F-35 सौदा अमेरिका-सऊदी रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अंतिम बिक्री और विमानों की डिलीवरी से पहले अमेरिकी कांग्रेस की प्रक्रिया तथा सुरक्षा संबंधी शर्तें अहम भूमिका निभाएंगी।