Noel Tata (नई दिल्ली):- टाटा समूह की सबसे अहम कंपनी टाटा सन्स को शेयर बाजार में उतारने की तैयारी के बीच मामला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। कंपनी के बोर्ड की ओर से लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने को मंजूरी मिलने के बावजूद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई है।
टाटा सन्स में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में नोएल टाटा का रुख कंपनी की संभावित लिस्टिंग के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर वह टाटा सन्स को सार्वजनिक कंपनी बनाने के पक्ष में क्यों नहीं हैं?
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Noel Tata:- 1. दशकों पुरानी व्यवस्था में बदलाव नहीं चाहते
टाटा समूह का कारोबारी मॉडल सामान्य कॉरपोरेट कंपनियों से अलग रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत टाटा ट्रस्ट्स की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी और उससे जुड़ी परोपकारी गतिविधियां हैं।
नोएल टाटा का रुख इसी मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने पर केंद्रित है। उनका मानना है कि टाटा समूह की लंबे समय से चली आ रही संरचना को अचानक बदलने से उसके काम करने के तरीके में बड़ा परिवर्तन आ सकता है।
Noel Tata:- 2. रतन टाटा की अगुआई वाली बैठक का हवाला
टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने बोर्ड बैठक में 2024 में हुई उस बैठक का उल्लेख किया, जिसकी अध्यक्षता रतन टाटा ने की थी। उस बैठक में टाटा सन्स को फिलहाल अनलिस्टेड रखने का फैसला किए जाने की बात कही गई थी।

नोएल टाटा के मुताबिक, सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट भी टाटा सन्स को शेयर बाजार से बाहर रखने के पक्ष में थे।
Noel Tata:- 3. ट्रस्ट्स की सामाजिक भूमिका बनी रहे
टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका केवल टाटा सन्स में शेयर रखने तक सीमित नहीं है। ट्रस्ट्स को मिलने वाले डिविडेंड का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों में किया जाता है।
यही ट्रस्ट-आधारित व्यवस्था टाटा समूह को एक अलग पहचान देती है। लिस्टिंग के बाद स्वामित्व और संचालन के ढांचे में संभावित बदलाव को लेकर इसी मॉडल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
Noel Tata:- 4. लिस्टिंग से बदल सकता है समूह का कॉरपोरेट ढांचा
टाटा सन्स की बाजार में एंट्री सामान्य IPO से अलग घटना होगी। यह कंपनी टाटा समूह की कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी रखने वाली प्रमुख होल्डिंग कंपनी है।
यदि कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होती है, तो उसकी शेयरधारिता, बाजार मूल्यांकन और कॉरपोरेट गवर्नेंस के स्वरूप में बदलाव आ सकता है। यही कारण है कि इस प्रस्ताव को टाटा समूह की मौजूदा व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Noel Tata:- 5. टाटा समूह की मूल पहचान को लेकर चिंता
टाटा समूह का इतिहास कारोबार के साथ-साथ परोपकारी कार्यों से भी जुड़ा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स के जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से काम किया जाता रहा है।
नोएल टाटा का रुख इस बात पर जोर देता है कि टाटा समूह की यह मूल संरचना और पहचान बरकरार रहनी चाहिए। उनके अनुसार, टाटा सन्स को अनलिस्टेड रखने की पुरानी व्यवस्था इसी व्यापक मॉडल से जुड़ी हुई है।
Noel Tata:- अब आगे क्या?
टाटा सन्स की लिस्टिंग को लेकर बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के रुख में अंतर ने इस पूरे मामले को महत्वपूर्ण बना दिया है। एक ओर लिस्टिंग की तैयारियों को लेकर बोर्ड स्तर पर कदम आगे बढ़ा है, वहीं ट्रस्ट्स की ओर से मौजूदा संरचना को बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
टाटा सन्स की संभावित लिस्टिंग सिर्फ एक कंपनी के शेयर बाजार में आने का मामला नहीं है। इसका संबंध टाटा समूह की स्वामित्व संरचना, ट्रस्ट्स की भूमिका और लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी मॉडल से भी है। इसलिए इस मुद्दे पर आगे होने वाले फैसलों पर बाजार और कॉरपोरेट जगत की नजर बनी हुई है।