Uyghur Rights (जेनेवा): संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद यानी UNHRC के मंच से उइगर समुदाय के अधिकारों को लेकर चिंता जताई गई है। उइगर मानवाधिकारों के एक पैरोकार ने विभिन्न देशों से अपील की कि वे उइगरों को चीन वापस भेजने की किसी भी जबरन प्रक्रिया को रोकें। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में रह रहे उइगरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार कार्यकर्ता ने UNHRC के समक्ष उइगर समुदाय के सामने मौजूद चुनौतियों को उठाया। उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे ऐसे किसी भी कदम से बचें, जिससे उइगरों को उनकी इच्छा के विरुद्ध चीन लौटना पड़े। मानवाधिकार संगठनों की चिंता है कि जबरन वापसी की स्थिति में संबंधित लोगों को गंभीर अधिकारों से जुड़े जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
जबरन वापसी को लेकर चिंता
उइगर समुदाय मुख्य रूप से चीन के शिनजियांग क्षेत्र में निवास करता है। पिछले कई वर्षों से शिनजियांग में उइगरों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस होती रही है। मानवाधिकार समूहों ने हिरासत, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अधिकारों और निगरानी से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की अगस्त 2022 की रिपोर्ट में शिनजियांग में उइगरों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ मनमाने और भेदभावपूर्ण तरीके से हिरासत में रखे जाने के आरोपों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि वहां की कुछ नीतियां और कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय अपराधों, विशेषकर मानवता के खिलाफ अपराधों की श्रेणी में आ सकती हैं। हालांकि, चीन ने शिनजियांग से जुड़े आरोपों को खारिज किया है और अपनी नीतियों को आतंकवाद तथा उग्रवाद से निपटने की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया है।
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Uyghur Rights: देशों से सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग
मानवाधिकार पैरोकार ने देशों से कहा कि वे उइगर शरणार्थियों और प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे देश में वापस नहीं भेजा जाना चाहिए, जहां उसे उत्पीड़न या गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का खतरा हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून में शरणार्थियों की सुरक्षा और जबरन वापसी से जुड़े सिद्धांतों को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी संदर्भ में मानवाधिकार कार्यकर्ता देशों से यह सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं कि उइगरों के मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा की जाए तथा उन्हें कानूनी सुरक्षा उपलब्ध हो।
चीन पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
उइगरों से जुड़े मुद्दे पर चीन और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने शिनजियांग में मानवाधिकार स्थिति की स्वतंत्र निगरानी की मांग की है। दूसरी ओर, चीन का कहना है कि शिनजियांग में उसकी नीतियां विकास, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई हैं।
UNHRC में उठाई गई यह अपील ऐसे समय आई है जब विभिन्न देशों में रह रहे उइगरों की स्थिति और उनकी सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा जारी है। फिलहाल, यह मांग सामने आई है कि देशों को उइगरों की जबरन चीन वापसी रोकने, उनके मामलों की समीक्षा करने और मानवाधिकार मानकों के अनुरूप निर्णय लेने पर ध्यान देना चाहिए।