Pune Ganpati Visarjan 2026: (पुणे):- महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में 10 दिनों तक चले गणेशोत्सव का समापन शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन बेहद भावुक माहौल में हुआ। पुणे के और देश के पहले सार्वजनिक गणपति कहे जाने वाले श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति बप्पा को हजारों भक्तों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
Pune Ganpati Visarjan 2026: विसर्जन की प्रक्रिया सुबह श्री गणेश सुवर्णधाम में पारंपरिक पूजा और अनंत चतुर्दशी आरती के साथ शुरू हुई। उत्सव प्रमुख और ट्रस्टी पुनीत बालन और उनकी पत्नी जान्हवी धारीवाल-बालन ने बप्पा की अंतिम आरती की। ट्रस्ट के अनुसार बप्पा की पालकी को फूलों और केले के पत्तों से सजाए गए रथ पर विराजमान किया गया।
Pune Ganpati Visarjan 2026: पुणे की परंपरा के मुताबिक, भाऊसाहेब रंगारी गणपति का विसर्जन जुलूस पांच मानाचे गणपतियों के विसर्जन के बाद मंडई के तिलक पुतले से शुरू होता है। दोपहर बाद शुरू हुआ यह जुलूस छत्रपति शिवाजी महाराज रोड, बुधवार चौक, अप्पा बलवंत चौक और बाजीराव रोड से होते हुए आगे बढ़ा।
Pune Ganpati Visarjan 2026: इस विसर्जन जुलूस की सबसे बड़ी खासियत रही कि यह पूरी तरह से DJ-फ्री था। ट्रस्ट ने पहले ही घोषणा की थी कि उत्सव पारंपरिक तरीके से मनाया जाएगा। डीजे और तेज आवाज वाले स्पीकर की जगह पूरे रास्ते पुणे के प्रसिद्ध ढोल-ताशा पथकों की थाप गूंजती रही। इसमें श्रीराम पथक, नादब्रह्म, ज्ञानप्रबोधिनी, आवर्तन, वाद्यवृंद, समर्थ और केशव शंखनाद जैसे पथकों ने हिस्सा लिया।
जुलूस में आढ़व बंधुओं का पारंपरिक नगरा वादन और मरदानी खेल के प्रदर्शन ने सभी का ध्यान खींचा। सफेद कुर्ता और भगवा जैकेट पहने शंखनाद पथक के युवाओं ने शंख बजाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। बुधवार चौक पर जब बप्पा पहुंचे तो सात रंगों के गुलाल की बरसात की गई। ‘गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या’ के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
Pune Ganpati Visarjan 2026: गौरतलब है कि भाऊसाहेब रंगारी गणपति का इतिहास 1892 से जुड़ा है। स्वतंत्रता सेनानी भाऊसाहेब रंगारी ने अंग्रेजों के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए पहली बार सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। बाद में इसी विचार से प्रेरित होकर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया। इसलिए इस गणपति को भारत का पहला सार्वजनिक गणपति माना जाता है।
Pune Ganpati Visarjan 2026: इस साल 14 सितंबर को बप्पा के आगमन पर प्राण प्रतिष्ठा प्रसिद्ध बांसुरी वादक पद्म विभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने की थी। 10 दिनों तक सुवर्णधाम में हजारों भक्तों ने दर्शन किए।
देर रात तक चले इस भव्य विसर्जन जुलूस के दौरान पुलिस का कड़ा बंदोबस्त रहा। आंखों में आंसू और अगले बरस जल्दी आने की कामना के साथ पुणेकर ने अपने लाडले बप्पा को विदा किया।