Trump Xi Meeting (वॉशिंगटन):- व्हाइट हाउस में रेड कार्पेट बिछा था, फर्स्ट लेडीज की मौजूदगी थी और कैमरों के सामने मुस्कुराहट भी थी। लेकिन पिछले हफ्ते हुई डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात वाकई उतनी गर्मजोशी भरी थी जितनी दिखाई दी? जवाब है – शायद नहीं।
25 सितंबर को व्हाइट हाउस में हुई इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग के बाद कोई साझा बयान जारी नहीं हुआ। दोनों देशों ने अपना-अपना वर्जन जारी किया। ये इस बात का संकेत है कि वादों के बावजूद वॉशिंगटन और बीजिंग अब भी एक-दूसरे को लेकर सतर्क हैं।

Trump Xi Meeting: AI पर नई बातचीत, टकराव रोकने की कोशिश
इस मीटिंग से 4 बड़ी बातें सामने आईं। पहली – AI पर। बीजिंग ने बताया कि चीन और अमेरिका AI पर नई बातचीत शुरू करने को तैयार हो गए हैं। अगली बैठक नवंबर के आखिर में होगी।
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दुनिया में AI की होड़ चल रही है, कारोबार से लेकर सेना तक में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। दोनों देश एआई से जुड़ी घटनाओं की जानकारी साझा करने के लिए एक संपर्क व्यवस्था बनाने पर भी सहमत हुए हैं, ताकि किसी गलतफहमी से बड़ा टकराव न हो।
इस पर सबकी नजर थी क्योंकि Anthropic जैसी अमेरिकी कंपनियां AI की रफ्तार धीमी करने की मांग कर रही हैं, और OpenAI पर बिना अनुमति डेटा एक्सेस के आरोप भी लगे हैं।
Trump Xi Meeting: ट्रेड डील सिर्फ 10 जनवरी तक बढ़ी, बड़ी राहत नहीं
दूसरी बात – व्यापार। चीन के सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच अस्थायी ट्रेड समझौता 10 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। ये दो महीने का विस्तार है, जबकि चीन इसे लंबी अवधि तक बढ़ाना चाहता था। इसलिए इसे बड़ी सफलता नहीं माना जा रहा।
अमेरिका ने 30 अरब डॉलर के चीनी सामान – खिलौने, छोटे घरेलू उपकरण, क्रिसमस सजावट – पर टैरिफ कम किया है। बदले में चीन भी अमेरिकी सामान पर टैरिफ घटाएगा। ट्रंप प्रशासन ने दावा किया है कि चीन 2027 और 2028 में हर साल कम से कम 1 करोड़ मीट्रिक टन कोयला खरीदेगा।
लेकिन जो बातें नहीं हुईं वो ज्यादा अहम हैं। रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर कोई बात नहीं हुई, जो अमेरिका के लिए सबसे जरूरी है। और न ही एडवांस अमेरिकी सेमीकंडक्टर पर लगी पाबंदी में ढील का कोई संकेत मिला।
Trump Xi Meeting: ताइवान पर अमेरिका ने साधी चुप्पी, चीन ने उठाया मुद्दा
तीसरी और सबसे चौंकाने वाली बात – ताइवान। व्हाइट हाउस के बयान में ताइवान का जिक्र तक नहीं था। लेकिन चीन के बयान में शी जिनपिंग ने ट्रंप से साफ कहा कि अमेरिका को औपचारिक रूप से ताइवान की आजादी का विरोध करना चाहिए।
मई में ट्रंप ने बताया था कि शी ने उनसे पूछा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करे तो क्या अमेरिका उसकी रक्षा करेगा। ट्रंप ने कहा था – इसका जवाब सिर्फ मैं जानता हूं।
इस बार ट्रंप ने कहा कि हमने इस पर बहुत ज्यादा बात नहीं की।” ट्रंप की ये चुप्पी अहम है, क्योंकि वो पहले ताइवान के लिए 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को चीन से बातचीत में सौदेबाजी का जरिया बता चुके हैं। ये पैकेज महीनों से रुका है।
इसी बीच चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू ने Fox News पर कह दिया कि ट्रंप ने शी को हथियार बेचने की पेशकश की थी। बाद में विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी कि अमेरिकी कानून चीन को हथियार बेचने की इजाजत नहीं देता।
Trump Xi Meeting: विदेशी निवेश पर चीन ने दरवाजा खोला, पर चाबी अपने पास रखी
चौथी बात – निवेश। चीन ने कहा है कि वो अमेरिका समर्थित बैंकों, निवेश और बीमा कंपनियों को देश में कारोबार करने और दफ्तर खोलने की इजाजत देगा। लेकिन मंजूरी चीन के कानूनों के तहत ही मिलेगी। यानी दरवाजा खुला, पर अंदर किसे आना है ये फैसला बीजिंग का ही होगा।
विदेशी कंपनियां लंबे समय से लाइसेंस, नियमों की रुकावट और देश छोड़ने पर रोक का डर बताती रही हैं। दोनों देशों के बीच उड़ानें बढ़ाने की भी बात हुई, पर कैसे – ये नहीं बताया गया।
चीन ने 75 से ज्यादा देशों को वीजा-फ्री एंट्री दी है, पर अमेरिकियों को नहीं। वहीं अमेरिका ने अब भी चीन यात्रा को लेवल-2 की चेतावनी में रखा है।
Trump Xi Meeting: नतीजा क्या निकला?
कुल मिलाकर मीटिंग से बातचीत के रास्ते तो खुले, पर बड़े फैसलों में कोई बदलाव नहीं। टेक्नोलॉजी से लेकर ताइवान तक, सबसे बड़े विवाद वैसे ही हैं। दोनों नेता रिश्तों में स्थिरता चाहते हैं, पर समझौते के लिए कोई भी महाशक्ति तैयार नहीं है।
अगली मुलाकातें तय हैं – ट्रंप नवंबर में शेनझेन में APEC में जाएंगे और शी दिसंबर में मियामी में G20 के लिए आएंगे।