RBI Monetary Policy (नई दिल्ली): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की चुनौती बढ़ती नजर आ रही है। BNP Paribas की एक रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, महंगाई और वैश्विक स्तर पर ऊंची बॉन्ड यील्ड ने भारत के आर्थिक परिदृश्य पर दबाव बढ़ाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन परिस्थितियों के चलते RBI के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक अपरिवर्तित रखना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है।
RBI ने अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। अब अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर बाजार की नजर बनी हुई है।
100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
BNP Paribas की रिपोर्ट के अनुसार हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी का असर घरेलू महंगाई और रुपये पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो सप्ताह में भारतीय रुपया करीब 1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। वहीं भारत की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 7 प्रतिशत के स्तर से ऊपर चली गई है। इन परिस्थितियों को RBI के लिए मौद्रिक नीति से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।
RBI Monetary Policy: वैश्विक ब्याज दरों का भी असर
दुनिया के कई प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियां भी भारत के लिए महत्वपूर्ण हो गई हैं। BNP Paribas के मुताबिक यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान ने 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि की है। वैश्विक ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दरों का अंतर प्रभावित हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार इससे पूंजी के प्रवाह और रुपये पर दबाव से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली भी दोबारा देखने को मिली है।
भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार का सहारा
हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कुछ मजबूत सुरक्षा कवच भी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 800 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें विदेशी मुद्रा अनिवासी यानी FCNR प्रवाह का भी योगदान है।
BNP Paribas ने हालांकि आगाह किया कि ये प्रवाह निकट अवधि में मददगार हो सकते हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में इनमें बदलाव संभव है। इसलिए केवल विदेशी मुद्रा भंडार के आधार पर मौद्रिक नीति के जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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RBI Monetary Policy: घरेलू अर्थव्यवस्था में कुछ सकारात्मक संकेत
रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था के कुछ मजबूत पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। बैंक क्रेडिट ग्रोथ, ऑटोमोबाइल बिक्री, रोजगार से जुड़े आंकड़े और पर्याप्त खाद्यान्न भंडार को सहायक कारकों के रूप में बताया गया है।
हालांकि शहरी आय में कमजोरी, बढ़ती महंगाई और कारोबारी विश्वास में नरमी से खपत पर दबाव की आशंका जताई गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी मानसून की कमी, खाद्य महंगाई और कम बुवाई का असर पड़ सकता है।
अक्टूबर की MPC बैठक पर नजर
RBI की अगली मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच निर्धारित है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर फैसला महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की स्थिति, घरेलू आर्थिक गतिविधियों और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। Reuters के एक सर्वे में लगभग 60 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने अक्टूबर बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है, लेकिन यह बाजार सर्वेक्षण है, RBI का घोषित निर्णय नहीं।