AI education (नई दिल्ली): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने पढ़ाई और सीखने के तरीकों में तेजी से बदलाव किया है। छात्र अब कठिन सवालों के जवाब, विषयों की व्याख्या और जानकारी जुटाने के लिए अलग-अलग AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे समय में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या AI के कारण छात्रों के लिए खुद मेहनत करके सीखने की जरूरत कम हो जाएगी। IIT खड़गपुर की कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर सुदेशना सरकार ने AI और लर्निंग से जुड़े कुछ आम भ्रमों पर बात करते हुए इस सोच को चुनौती दी है।
पहला भ्रम- AI जवाब देता है तो समझ भी आ गई
प्रोफेसर सुदेशना सरकार के मुताबिक, AI किसी सवाल का जवाब या उसकी व्याख्या कुछ ही सेकंड में दे सकता है, लेकिन जवाब मिल जाना और विषय को वास्तव में समझ लेना एक जैसी बातें नहीं हैं। छात्र जब किसी समस्या को खुद हल करने की कोशिश करते हैं, गलतियां करते हैं और फिर उन गलतियों को सुधारते हैं, तो उनकी समझ ज्यादा मजबूत होती है।
AI से मिली जानकारी को सीखने का अंतिम चरण मानने के बजाय उसे अपनी समझ विकसित करने के एक साधन के तौर पर इस्तेमाल करना अधिक उपयोगी हो सकता है। इससे छात्र जानकारी को केवल पढ़ने के बजाय उसके पीछे की प्रक्रिया और तर्क को समझने पर भी ध्यान दे सकते हैं।
AI education: दूसरा भ्रम- सवाल में अटकना समय की बर्बादी है
पढ़ाई के दौरान किसी सवाल को हल करने में परेशानी होना सामान्य है। कई बार छात्र किसी समस्या पर कुछ समय सोचने के बजाय तुरंत AI से उसका समाधान पूछ लेते हैं। प्रोफेसर के अनुसार, समस्या से जूझने और अलग-अलग तरीकों से उसका हल खोजने की प्रक्रिया भी सीखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जब छात्र किसी सवाल पर खुद विचार करते हैं, तो उन्हें अपनी गलतियों और कमजोरियों का पता चलता है। यही प्रक्रिया आगे नई समस्याओं को समझने और उनका समाधान निकालने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकती है।
तीसरा भ्रम- AI के बाद मेहनत की जरूरत नहीं
AI ने पढ़ाई से जुड़े कई काम आसान और तेज जरूर किए हैं, लेकिन इससे मेहनत और सीखने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। प्रोफेसर सुदेशना सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक लगातार बदल रही है, इसलिए छात्रों को नई तकनीकों के साथ खुद को अपडेट करते रहना चाहिए। साथ ही सीखने के लिए जरूरी प्रयास भी जारी रखना होगा।
इसका मतलब यह है कि छात्रों के लिए केवल जानकारी हासिल करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें जानकारी को समझने, उसका विश्लेषण करने और अलग परिस्थितियों में उसका इस्तेमाल करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। सोचने, तर्क करने और स्वतंत्र रूप से समस्या हल करने की क्षमता AI के दौर में भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
AI education: AI को सीखने का सहायक बनाना जरूरी
IIT खड़गपुर की ओर से छात्रों के लिए AI आधारित लर्निंग पहल पर भी काम किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान की National Digital Library of India (NDLI) के माध्यम से ऐसा AI आधारित अनुभव विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल जवाब उपलब्ध कराना नहीं बल्कि उन्हें सोचने और समस्या हल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके लिए संस्थान ने Fermi AI के साथ सहयोग किया है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच छात्रों के लिए सबसे अहम बात यह है कि वे तकनीक का इस्तेमाल अपनी सीखने की क्षमता को मजबूत करने के लिए करें। किसी उत्तर को तुरंत हासिल करने के बजाय उसके पीछे की वजह समझना, खुद प्रयास करना और गलतियों से सीखना लंबे समय में सीखने की प्रक्रिया को मजबूत कर सकता है।