Energy Subsidy 2026: वैश्विक संकटों के बीच ऊर्जा सब्सिडी पर बढ़ेगा बोझ, इस साल 1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचने का अनुमान

Energy Subsidy 2026 (नई दिल्ली): दुनिया के कई देशों में बढ़ती ऊर्जा कीमतों से आम लोगों को राहत देने के लिए सरकारों की ओर से किए जा रहे खर्च का बोझ लगातार बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस साल वैश्विक स्तर पर ईंधन सब्सिडी 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक संकटों के बीच सरकारों के लिए उपभोक्ताओं को बढ़ती ऊर्जा कीमतों से बचाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए अलग-अलग देशों ने मूल्य सीमा, सब्सिडी और टैक्स राहत जैसे उपाय अपनाए हैं। अप्रैल से सितंबर के बीच ऐसे राहत उपाय लागू करने वाले देशों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई। UNDP का विश्लेषण विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों पर आधारित है।

ऊर्जा संकट का बढ़ता आर्थिक दबाव

UNDP के अनुसार मौजूदा स्थिति पर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, बढ़ती उधारी लागत और मौसम संबंधी जोखिमों का असर पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले महीनों में सरकारों के लिए ऊर्जा कीमतों से राहत देने वाली योजनाओं को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन, बिजली और अन्य क्षेत्रों पर पड़ता है। ऐसे में कई सरकारें उपभोक्ताओं पर अचानक बढ़ने वाले बोझ को कम करने के लिए अलग-अलग वित्तीय उपायों का सहारा ले रही हैं। हालांकि, इन उपायों से सरकारी बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

Energy Subsidy 2026: 13 करोड़ लोगों पर पड़ सकता था असर

रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण अनुमान यह भी दिया गया है कि अगर सरकारों ने राहत उपाय उपलब्ध नहीं कराए होते, तो इस साल करीब 13 करोड़ अतिरिक्त लोग प्रतिदिन 6.85 डॉलर की आय वाली गरीबी रेखा से नीचे जा सकते थे। इससे पता चलता है कि ऊर्जा कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का असर केवल ईंधन और बिजली के बिलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव लोगों की आय और जीवन-यापन की लागत पर भी पड़ सकता है।

2027 की शुरुआत तक जारी रह सकता है दबाव

UNDP ने आने वाले महीनों को महत्वपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा संकटों का संयुक्त प्रभाव 2027 की शुरुआत में चरम पर पहुंच सकता है। इसमें इस साल संभावित मजबूत El Niño का असर भी शामिल है, जो कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और सूखे जैसी परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है और खाद्य सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

वहीं, IEA की 2026 की रिपोर्ट बताती है कि सरकारों की ऊर्जा संबंधी वित्तीय सहायता अभी भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर है। 2025 में ऊर्जा से जुड़े सरकारी वित्तीय प्रावधान करीब 405 अरब डॉलर सालाना रहने का अनुमान था। IEA के मुताबिक 2022-23 के दौरान सरकारों ने घरेलू ऊर्जा कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए करीब 220 अरब डॉलर की सहायता दी थी।

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Energy Subsidy 2026: सब्सिडी के साथ दीर्घकालिक समाधान पर भी जोर

ऊर्जा संकट के बीच विशेषज्ञ संस्थाएं केवल तत्काल राहत के बजाय दीर्घकालिक उपायों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताती रही हैं। IEA के अनुसार ऊर्जा दक्षता, घरेलू ऊर्जा उत्पादन और कम-उत्सर्जन वाले विकल्पों में निवेश से भविष्य में अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम किया जा सकता है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती ऊर्जा सब्सिडी इस बात का संकेत है कि सरकारें एक तरफ उपभोक्ताओं को महंगी ऊर्जा से राहत देने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें सीमित सरकारी संसाधनों और बढ़ती उधारी लागत के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। आने वाले महीनों में ऊर्जा कीमतों और वैश्विक संकटों की दिशा इस खर्च पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

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