RBI Policy 2026: नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बीच बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही रेपो रेट अब 5.50 प्रतिशत हो गया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब RBI ने रेपो रेट बढ़ाया है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से दर बढ़ाने का फैसला किया, जबकि नीति रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया गया।
1. रेपो रेट बढ़कर 5.50%
RBI Policy 2026: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई के बदलते परिदृश्य को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद यह 5.50% हो गया है। वहीं, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी रेट 5.25% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी तथा बैंक रेट 5.75% हो गए हैं।
2. महंगाई पर RBI की नजर
RBI Policy 2026: केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI आधारित महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। RBI को तीसरी तिमाही में महंगाई के 6% तक पहुंचने का अनुमान है, जिसके बाद चौथी तिमाही में इसके 5.7% रहने की उम्मीद जताई गई है। गवर्नर ने संकेत दिया कि महंगाई का जोखिम अब पहले की तरह सामान्य नहीं है।
3. GDP ग्रोथ पर भरोसा बरकरार
RBI Policy 2026: महंगाई की चिंता के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर अपना अनुमान बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है। पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही, जिसे मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों का संकेत माना गया।
4. कमजोर मॉनसून और महंगा कच्चा तेल चुनौती
RBI Policy 2026: RBI ने महंगाई के लिए कई जोखिमों की ओर इशारा किया है। इनमें कमजोर मॉनसून, अल-नीनो और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख हैं। तेल की कीमतों में तेजी से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।
5. जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं
RBI Policy 2026: रेट बढ़ाने के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि निकट अवधि में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। आगे का कदम एक और बढ़ोतरी या फिर दरों को स्थिर रखने के रूप में हो सकता है। यानी RBI फिलहाल महंगाई को नियंत्रित करने को प्राथमिकता देता नजर आ रहा है।
कुल मिलाकर RBI का ताजा फैसला महंगाई पर सख्ती और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। एक तरफ केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण का संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा भी जताया है।