Enforcement Directorate: 40 PSU और बैंकों तक पहुंचा 200 करोड़ के CSR फंड का कथित रैकेट, ED ने 21 लाख रुपये कैश किया जब्त

Enforcement Directorate (नई दिल्ली): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से जुड़े कथित बड़े वित्तीय रैकेट की जांच में कई अहम खुलासे किए हैं। एजेंसी के मुताबिक करीब 200 करोड़ रुपये के CSR फंड को कथित तौर पर ट्रस्टों, बिचौलियों और शेल कंपनियों के जरिए घुमाकर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इस मामले की जांच में देशभर के कम से कम 40 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े CSR योगदान सामने आए हैं।

ED के अनुसार इस कथित नेटवर्क में धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह नाम का व्यक्ति भी शामिल है, जिसने लंबे समय तक खुद को डॉक्टर के तौर पर पेश किया। एजेंसी का दावा है कि उसके पास मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यता या मेडिकल काउंसिल का पंजीकरण नहीं था। जांच के मुताबिक उसने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े CSR प्रोजेक्ट्स के नाम पर कई ट्रस्टों के माध्यम से फंड जुटाने की व्यवस्था तैयार की थी।

Enforcement Directorate: जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कुछ CSR प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने के बाद या तो पूरी तरह लागू नहीं किया गया या प्राप्त धनराशि के अनुपात में काम नहीं हुआ। इसके अलावा कुछ मामलों में वेंडर बिलों को कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और अतिरिक्त धन को अलग-अलग संस्थाओं के जरिए स्थानांतरित करने की बात सामने आई है। ED के मुताबिक इस प्रक्रिया में बिचौलियों और एजेंटों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

ED ने 1 अक्टूबर को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में कुल आठ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इन कार्रवाइयों के दौरान एजेंसी ने दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों के साथ करीब 21 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त किए जाने की जानकारी दी। एजेंसी अब इन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर कथित फंड फ्लो की जांच कर रही है।

Sourav Ganguly: सौरव गांगुली ने हितों के टकराव पर दिया जवाब, दिल्ली कैपिटल्स के हेड कोच बनने के बाद उठे सवाल

Enforcement Directorate: जांच में यह भी सामने आया कि CSR फंड को अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराने वाले प्रोजेक्ट्स से जोड़ा गया था। ED के अनुसार कुछ मामलों में संबंधित संस्थानों को फंडिंग के लिए सार्वजनिक प्रतिनिधियों की सिफारिशों के माध्यम से ट्रस्टों तक पहुंचाया गया। इसके बाद PSU और अन्य संस्थाओं से CSR योगदान इन ट्रस्टों को मिलने की बात जांच में सामने आई है।

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ निजी कंपनियों से प्राप्त CSR योगदान का एक बड़ा हिस्सा कमीशन काटने के बाद नकद रूप में वापस किया जाता था। इसके अलावा CSR फंड को कथित तौर पर बिचौलियों और शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए आगे भेजा गया। जांच में सामने आई कुछ कंपनियों का नाम पहले की GST संबंधी जांचों में भी सामने आने की बात कही गई है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। ED की ओर से सामने रखे गए आरोप जांच के निष्कर्षों का हिस्सा हैं और संबंधित आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *