Special Intensive Revision (नई दिल्ली): चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने चुनाव आयोग की जांच की मांग की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने और मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की। तिवारी ने आरोपों के संदर्भ में कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया गया है। उनके ये बयान राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट से नहीं होती।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
ANI के मुताबिक, प्रमोद तिवारी ने चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को मामले का संज्ञान लेना चाहिए और उसकी निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने आयोग के कामकाज को लेकर सामने आए सवालों की जांच की मांग की।
तिवारी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों से जुड़ी एक रिपोर्ट के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं तेज हुई हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों के जवाब में भाजपा नेताओं की ओर से दिए जा रहे बयानों पर भी सवाल उठाया।
Special Intensive Revision: दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट
विवाद की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर मतदाता सूची, Form 6, मतदाता डेटा और चुनाव आयोग की तकनीकी व्यवस्था से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट में जिन मुद्दों का उल्लेख किया गया, उनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form 6 में बदलाव, चुनावी डेटा के प्रबंधन और कुछ राज्यों में मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ मामलों में प्रक्रियागत और कानूनी चिंताएं भी दर्ज की थीं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की व्याख्या को लेकर अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि अलग-अलग विचार, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव किसी भी बहुसदस्यीय संस्था की निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में लिए गए उसके सभी अंतिम फैसले, जिनमें SIR से जुड़े फैसले भी शामिल हैं, सर्वसम्मति से लिए गए।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि आंतरिक नोट्स और सुझावों को अंतिम संस्थागत निर्णय से अलग करके देखने पर तस्वीर का केवल एक हिस्सा सामने आता है। आयोग ने अपने डिजिटल सिस्टम और चुनावी प्रक्रियाओं के संबंध में कानूनी प्रक्रिया तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किए जाने की बात भी कही है।
Special Intensive Revision: राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों के कई नेताओं ने हाल के दिनों में सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने अपने निर्णयों को सर्वसम्मत बताते हुए आंतरिक विचार-विमर्श को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। ऐसे में विवाद के केंद्र में अब कथित आंतरिक आपत्तियों और आयोग के अंतिम फैसलों के बीच संबंध को लेकर अलग-अलग दावे हैं।
फिलहाल प्रमोद तिवारी की मांग राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच या एफआईआर को लेकर इस बयान से अलग कोई अंतिम न्यायिक आदेश इस रिपोर्ट में सामने नहीं आया है। मामले में चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष यह है कि उसके अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।