Election Commission (नई दिल्ली): चुनाव आयोग के ECINet सॉफ्टवेयर को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनाव आयोग से इस सॉफ्टवेयर को वापस लेने की मांग की है। यह मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के दौरान सामने आई कुछ तकनीकी और प्रशासनिक चिंताओं से जुड़ा है। थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चुनाव आयोग से प्रभावित मतदाताओं के मामले में कार्रवाई और सॉफ्टवेयर को रद्द करने की मांग की।
ECINet चुनाव आयोग का एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल चुनाव संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ अधिकारियों द्वारा विभिन्न चुनावी प्रक्रियाओं में भी किया जाता है। चुनाव आयोग ने इसे जनवरी 2026 में लॉन्च किया था। इससे पहले इसका बीटा संस्करण बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान परीक्षण के लिए इस्तेमाल किया गया था।
97 मतदाताओं का मामला क्या है?
विवाद की ताजा वजह गोवा से जुड़ी एक रिपोर्ट है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के निर्वाचन अधिकारियों ने 97 ऐसे मतदाताओं के मामलों की समीक्षा की थी, जिन्हें स्थानीय स्तर पर सुनवाई और जांच के बाद मतदाता सूची में शामिल किए जाने के योग्य पाया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने चुनाव आयोग को कई बार संपर्क किया। आरोप है कि स्थानीय अधिकारियों के फैसले के बावजूद ECINet के जरिए इन नामों को वापस जोड़ने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि इसके लिए आवश्यक अनुमति केंद्रीय स्तर पर नियंत्रित थी।
यही मामला अब चुनावी प्रक्रिया में तकनीकी प्रणाली और स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है।
Election Commission: शशि थरूर ने क्या कहा?
रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे गंभीर मामला बताया। उन्होंने चुनाव आयोग से प्रभावित नागरिकों से माफी मांगने और ECINet सॉफ्टवेयर को वापस लेने की मांग की। थरूर का कहना है कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाता है तो इसका असर उसके संवैधानिक अधिकारों पर पड़ सकता है। उनके बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं और इनमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट से नहीं होती।
पहले भी उठ चुके हैं ECINet पर सवाल
ECINet को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं पर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कई फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता डेटा और डिजिटल सिस्टम के केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की व्याख्या पर आपत्ति जताई है। आयोग का कहना है कि बहुसदस्यीय संस्था में नोट्स, टिप्पणियां और अलग-अलग सुझाव निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं और पिछले एक साल में उसके अंतिम फैसले, SIR सहित, सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा और ऑडिट नियंत्रण लागू होने की भी बात कही है।
Election Commission: तकनीक बनाम स्थानीय अधिकारियों की भूमिका
इस विवाद का एक अहम पहलू यह है कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका कितनी होनी चाहिए और स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों के अधिकार किस तरह सुनिश्चित किए जाएं। रिपोर्टों में ECINet के साथ ERONet के एकीकरण और मतदाता डेटा के केंद्रीकृत प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने तकनीक को बड़े पैमाने पर मतदाता सूची प्रबंधन के लिए जरूरी बताया है।
फिलहाल ECINet को रद्द करने की कोई घोषणा चुनाव आयोग की ओर से सामने नहीं आई है। विवाद के बीच एक तरफ कांग्रेस नेताओं की ओर से जवाबदेही और सॉफ्टवेयर वापस लेने की मांग की जा रही है, जबकि चुनाव आयोग अपने डिजिटल सिस्टम और निर्णय प्रक्रिया को वैधानिक तथा सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुरूप बता रहा है।