चितरंगी धार्मिक आयोजन (चितरंगी): विवेक मिश्रा की स्पेशल रिपोर्ट। चितरंगी में रंगनाथ जायसवाल के घर पर आयोजित 24 घंटे के यथार्थ गीता पाठ का गुरु वंदना, सत्संग और भंडारे के साथ समापन हुआ। कार्यक्रम में श्री परमहंस आश्रम बैकुंठ धाम क्योंटली, चितरंगी से पहुंचे संत अच्युतानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन और गुरु भक्ति का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गुरु वंदना के साथ हुई। यथार्थ गीता मंडली मुन्ना लाल यादव, पसियाही, शक्तेशगढ़, चुनार से जुड़े सदस्यों ने भी पाठ में सहभागिता की। इनमें विवेक यादव, सुरेश, मनोज, विकी और अंकित यादव प्रमुख रूप से शामिल रहे। पाठ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और धार्मिक वातावरण में गीता का पाठ किया।

चितरंगी धार्मिक आयोजन: समापन अवसर पर सत्संग को संबोधित करते हुए संत अच्युतानंद जी महाराज ने कहा कि समाज में आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक वातावरण के लिए लोगों को भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यथार्थ गीता का नियमित अध्ययन और पाठ व्यक्ति को आध्यात्मिक चिंतन की ओर प्रेरित कर सकता है।
संत ने श्रद्धालुओं से यथार्थ गीता का श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भजन, चिंतन, ध्यान और सुमिरन का केंद्र परमात्मा को बनाकर व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने गुरु भक्ति और निरंतर साधना के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
चितरंगी धार्मिक आयोजन:
संत अच्युतानंद जी महाराज ने यह भी कहा कि यदि यथार्थ गीता का पाठ श्रद्धा के साथ किया जाए तो इससे लोगों में धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार हो सकता है। उन्होंने समाज के लोगों से धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन के साथ अपने जीवन में उनके संदेशों को अपनाने की बात कही।
कार्यक्रम के समापन के बाद आयोजक रंगनाथ जायसवाल ने संत अच्युतानंद जी महाराज सहित बाहर से आए सभी सदस्यों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
चितरंगी धार्मिक आयोजन:
24 घंटे तक चले इस धार्मिक आयोजन में अतुल कुमार सिंह, अंकित सिंह, कप्तान सिंह, नागेंद्र सिंह, ईश्वर सिंह, नीरू जायसवाल, दिनेश गुप्ता, राम बहाल केवट, राजमणि जायसवाल, गुड्डू जायसवाल समेत सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने यथार्थ गीता के पाठ और सत्संग में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
आयोजकों के अनुसार ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों को आध्यात्मिक चिंतन, भक्ति और सामाजिक सद्भाव की दिशा में प्रेरित करने का माध्यम बन सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन के सफल समापन के बाद अपने-अपने स्थान के लिए रवाना हुए।