CJI सूर्यकांत (नई दिल्ली): मतदाता सूची में नाम जोड़ने से जुड़े फॉर्म 6 को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को फॉर्म 6 में कथित बदलाव को लेकर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर सवाल उठाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने फॉर्म 6 में किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है।
चिदंबरम की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विपक्षी दलों के INDIA ब्लॉक ने मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी आपत्तियां रखने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च किया।
CJI सूर्यकांत: चिदंबरम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने खुले न्यायालय में स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 में किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी। उनके मुताबिक, फॉर्म के साथ अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को केवल अलग दस्तावेज बताना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी चीज को फॉर्म में जोड़ना भी उसके स्वरूप में बदलाव यानी modification के तौर पर देखा जा सकता है।
दरअसल, फॉर्म 6 नए पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालिया विवाद ऑनलाइन फॉर्म में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर है। इस घोषणा में आवेदकों से उनके या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़े सवाल पूछे जाने की बात सामने आई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कहा था कि अदालत ने फॉर्म 6 के किसी modified version को मंजूरी नहीं दी है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि संबंधित रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह देखा जाएगा कि फॉर्म में बदलाव किसने किया। अदालत ने चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं।
CJI सूर्यकांत: वहीं, चुनाव आयोग की ओर से यह पक्ष सामने आया है कि फॉर्म 6 को बदला नहीं गया बल्कि SIR प्रक्रिया के तहत उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। आयोग ने यह भी कहा है कि गैर-SIR अवधि में नियमों के अनुसार लागू मूल फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।
चिदंबरम ने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की। कांग्रेस नेता ने SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेताओं के राजनीतिक दावे हैं और इनके संबंध में अंतिम स्थिति न्यायिक और आधिकारिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी SIR प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के बजाय मतदाताओं को बाहर करने की दिशा में प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने फॉर्म 7 के कथित दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया। ये दावे भी राजनीतिक आरोपों के रूप में सामने आए हैं।
फॉर्म 6 विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पहुंच चुका है। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि फॉर्म में अतिरिक्त घोषणा किस प्रक्रिया के तहत जोड़ी गई और इसके लिए किस स्तर पर निर्णय लिया गया। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग द्वारा रिकॉर्ड पेश किए जाने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।