NMC नई गाइडलाइन:नई दिल्ली: डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए सोशल मीडिया पर प्रचार करना अब पहले जैसा आसान नहीं होगा। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों के विज्ञापन तथा सार्वजनिक संचार को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें मरीजों को आकर्षित करने वाले भ्रामक, बढ़ा-चढ़ाकर किए गए और बिना प्रमाण वाले दावों पर सख्ती की गई है। NMC की वेबसाइट पर यह गाइडलाइन 6 अक्टूबर 2026 को जारी की गई है।
‘नंबर-1’ और ‘बेस्ट डॉक्टर’ जैसे दावों पर रोक
NMC नई गाइडलाइन:नई नीति के तहत डॉक्टर या अस्पताल खुद को ‘बेस्ट’, ‘नंबर-1’, ‘लीडिंग’, ‘मोस्ट ट्रस्टेड’, ‘टॉप’ या ‘नंबर वन स्पेशलिस्ट’ बताकर प्रचार नहीं कर सकेंगे, जब तक ऐसे दावों को स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से साबित न किया जा सके। इसी तरह इलाज के परिणाम को लेकर ‘गारंटीड इलाज’, ‘100 प्रतिशत सफलता’ या चमत्कारी उपचार जैसे दावे भी प्रचार का हिस्सा नहीं बनाए जा सकेंगे।
इसका उद्देश्य मरीजों को ऐसे दावों से बचाना है, जिनसे उन्हें किसी डॉक्टर या अस्पताल की क्षमता के बारे में वास्तविक स्थिति से अलग धारणा बन सकती है।
फेसबुक से लेकर पॉडकास्ट तक नियम लागू
NMC नई गाइडलाइन:गाइडलाइन का दायरा केवल पारंपरिक विज्ञापनों तक सीमित नहीं है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, वेबसाइट, ब्लॉग, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, पॉडकास्ट और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग जैसे डिजिटल माध्यम भी इसके दायरे में रखे गए हैं। यानी सोशल मीडिया पोस्ट या वीडियो को केवल ‘कंटेंट’ बताकर विज्ञापन संबंधी नियमों से बाहर नहीं रखा जा सकेगा।
डॉक्टरों और अस्पतालों को इलाज की सफलता दर, मरीजों की संख्या या केस रिजल्ट का ऐसा प्रचार करने से भी बचना होगा, जिससे चिकित्सा सेवा का व्यावसायिक प्रचार नजर आए।
मरज की फोटो और AI कंटेंट पर भी सख्ती
NMC नई गाइडलाइन:नई गाइडलाइन में मरीजों की फोटो, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड, क्लिनिकल तस्वीर और प्रशंसापत्र के इस्तेमाल को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। मरीज की पहचान से जुड़ी जानकारी का प्रचारात्मक इस्तेमाल नियमों और उचित सहमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
AI से तैयार प्रचार सामग्री को लेकर भी आयोग ने विशेष प्रावधान किए हैं। AI की मदद से मरीज की तस्वीर, आवाज, प्रशंसापत्र या इलाज के नतीजे को बदलकर पेश करना प्रतिबंधित है। जहां अनुमत AI सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, वहां उसके AI-निर्मित होने की जानकारी स्पष्ट करनी होगी।
डिस्काउंट और रेफरल से मरीज जुटाने पर भी रोक
NMC नई गाइडलाइन:गाइडलाइन में मरीजों को आकर्षित करने के लिए कूपन, कैशबैक, उपहार, सीमित अवधि के ऑफर, मुफ्त प्रक्रिया और रेफरल लाभ जैसे तरीकों पर भी रोक लगाई गई है। इसके अलावा मरीज लाने के लिए कमीशन या लीड-जनरेशन फीस जैसी व्यवस्थाओं को भी प्रतिबंधित किया गया है।
हालांकि डॉक्टरों को स्वास्थ्य जागरूकता, जनस्वास्थ्य और शैक्षणिक विषयों पर लोगों से संवाद करने की अनुमति रहेगी। वे टीवी, रेडियो और डिजिटल माध्यमों पर बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी साझा कर सकते हैं, लेकिन इसे अपने क्लिनिक या अस्पताल के व्यावसायिक प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जा सकेगा।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
NMC नई गाइडलाइन:NMC ने स्पष्ट किया है कि गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। प्रक्रिया के तहत संबंधित डॉक्टर को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। वहीं अस्पताल अपनी वेबसाइट पर नाम, संपर्क जानकारी, विभाग, सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं, मान्यता, शुल्क और डॉक्टरों की योग्यता जैसी तथ्यात्मक जानकारी दे सकेंगे।
नई गाइडलाइन का मूल संदेश यही है कि मेडिकल प्रचार में जानकारी दी जा सकती है, लेकिन मरीज को प्रभावित करने के लिए गारंटी, अतिशयोक्ति या भ्रामक तुलना का सहारा नहीं लिया जा सकता।