अमेरिका टैरिफ: अमेरिकी नौकरियां विदेश भेजने वाली कंपनियों पर भारी टैरिफ की चेतावनी, जेडी वेंस का बड़ा बयान

अमेरिका टैरिफ: अमेरिकी नौकरियों को लेकर कंपनियों पर सख्ती के संकेत

(वॉशिंगटन): अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन कंपनियों को भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है, जो अमेरिकी नौकरियों को विदेश भेजती हैं या अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कानूनी रूप से काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं। ओहायो के लीमा शहर में रिपब्लिकन पार्टी की मध्यावधि चुनाव रैली को संबोधित करते हुए वेंस ने कहा कि अमेरिका में उत्पादन करने और अमेरिकी नागरिकों को रोजगार देने वाली कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

वेंस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब ट्रंप प्रशासन विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और रोजगार आधारित आव्रजन व्यवस्था पर सख्ती कर रहा है। उनके बयान से अमेरिकी रोजगार नीति और विदेशी प्रतिभा की भर्ती को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने पर जोर

वेंस ने कहा कि जो कंपनियां अमेरिका में सामान बनाती हैं और अमेरिकी नागरिकों को रोजगार देती हैं, उन्हें करों में राहत और कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

इसके विपरीत, उन्होंने उन कंपनियों को चेतावनी दी जो अपने कारखाने या नौकरियां विदेश स्थानांतरित करती हैं अथवा अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं। वेंस ने ऐसी कंपनियों पर भारी टैरिफ लगाने की बात कही।

हालांकि, उन्होंने अपने भाषण में किसी नई टैरिफ योजना की दर, समयसीमा या उसे लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया का ऐलान नहीं किया।

अमेरिका टैरिफ: विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पर विवाद

वेंस ने अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और वेतन की सुरक्षा को सरकार की प्राथमिकता बताया। उनका आरोप है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की भर्ती करके श्रम लागत कम करती हैं और अमेरिकी कर्मचारियों के अवसर प्रभावित करती हैं।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन की आव्रजन नीतियों की भी आलोचना की। वेंस के अनुसार, सरकार की नीतियों का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देना और देश में विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना होना चाहिए।

ये वेंस के राजनीतिक और आर्थिक नीतियों से जुड़े दावे हैं। उनके ताजा भाषण में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों पर किसी नई औपचारिक टैरिफ नीति का पूरा विवरण नहीं दिया गया।

ओहायो में निवेश का भी किया जिक्र

वेंस ने अमेरिका में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कंपनियों की निवेश योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में प्रस्तावित निवेश को घरेलू उत्पादन तथा रोजगार बढ़ाने के उदाहरण के रूप में पेश किया।

उनका कहना था कि कंपनियों को अमेरिका में कारखाने स्थापित करने, उत्पादन का विस्तार करने और स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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अमेरिका टैरिफ: भारतीय पेशेवरों पर भी पड़ सकता है असर

अमेरिका की रोजगार और आव्रजन नीतियां भारतीय पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। बड़ी संख्या में भारतीय विशेषज्ञ अमेरिकी तकनीकी कंपनियों में काम करते हैं। H-1B वीजा व्यवस्था अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देती है।

हाल के दिनों में ट्रंप प्रशासन ने कई बड़ी टेक कंपनियों की रोजगार आधारित स्थायी निवास प्रक्रिया यानी PERM पर भी कार्रवाई की है। यह प्रक्रिया ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के एक मार्ग से जुड़ी है और H-1B वीजा से अलग है।

भारत ने विदेशी पेशेवरों के बारे में अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि कुशल प्रतिभा का आदान-प्रदान दोनों देशों के लिए लाभकारी है।

आगे क्या होगा?

वेंस के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन घरेलू रोजगार और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों पर दबाव बढ़ाना चाहता है। हालांकि, किसी नई टैरिफ नीति की औपचारिक घोषणा नहीं होने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि चेतावनी किन कंपनियों या क्षेत्रों पर लागू होगी।

आने वाले समय में प्रशासन के फैसलों से पता चलेगा कि इन बयानों का अमेरिकी कारोबार, विदेशी कर्मचारियों की भर्ती और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कितना प्रभाव पड़ता है।

सोर्स: IANS (Indo-Asian News Service)

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