रूसी तेल विवाद: रूस से डीजल खरीदने के फैसले पर ट्रंप की आलोचना
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से डीजल की आपूर्ति हासिल करने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी प्रशासन ने जहां रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति अपनाई थी, वहीं अब घरेलू ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूस से डीजल लेने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिका और वैश्विक बाजारों के लिए डीजल की आपूर्ति करने पर सहमत हुए हैं। इस समझौते के बाद अमेरिकी टिप्पणीकारों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने वॉशिंगटन की नीति में कथित दोहरे मापदंडों को लेकर आलोचना की।
भारत पर दबाव और अमेरिका के फैसले में विरोधाभास?
विवाद की मुख्य वजह यह है कि अमेरिका पहले भारत समेत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाता रहा है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क रहा है कि रूसी ऊर्जा की खरीद से मॉस्को को आर्थिक लाभ मिलता है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया जा सकता है।
अब अमेरिका द्वारा खुद रूस से डीजल खरीदने की व्यवस्था किए जाने के बाद आलोचकों ने सवाल उठाया है कि यदि रूसी ऊर्जा खरीदना दूसरे देशों के लिए चिंता का विषय है, तो अमेरिका के लिए यही कदम कैसे उचित ठहराया जा सकता है।
अमेरिकी पत्रकार कैथरीन रैम्पेल और अन्य टिप्पणीकारों ने इस विरोधाभास को सार्वजनिक रूप से उठाया। यह बहस केवल ईंधन व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस के खिलाफ प्रतिबंधों और अमेरिकी विदेश नीति की निरंतरता पर भी सवाल खड़े करती है।
रूसी तेल विवाद: ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करना प्राथमिकता
ट्रंप प्रशासन की ओर से इस व्यवस्था का प्रमुख कारण अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना बताया गया है। डीजल की महंगी कीमतों का असर ट्रक परिवहन, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर पड़ता है। ऐसे में अतिरिक्त आपूर्ति से घरेलू बाजार को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, रूस शुरुआती चरण में तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल की आपूर्ति कर सकता है। इसके बाद नवंबर में अतिरिक्त आपूर्ति और आगे की खेपों की भी योजना बताई गई है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव आपूर्ति की मात्रा, समय और वैश्विक बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
प्रतिबंधों में छूट से बढ़ा विवाद
रूसी डीजल की आपूर्ति का रास्ता खोलने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने कुछ लेनदेन पर प्रतिबंधों में अस्थायी छूट भी दी है। इस फैसले की आलोचना अमेरिकी सांसदों और यूक्रेन की ओर से की गई है। आलोचकों का कहना है कि इससे रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है और मॉस्को पर दबाव बनाने के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन के लिए घरेलू ऊर्जा जरूरतों और कीमतों को संभालना एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
रूसी तेल विवाद: आगे क्या होगा?
रूस से डीजल आयात का फैसला अमेरिका की ऊर्जा जरूरतों और उसकी प्रतिबंध नीति के बीच संतुलन की चुनौती को सामने लाता है। इस घटनाक्रम का असर भारत-अमेरिका संबंधों और रूस के साथ वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
हालांकि, समझौते से ईंधन की कीमतों में कितनी राहत मिलेगी और प्रतिबंधों की नीति पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
सोर्स: IANS (Indo-Asian News Service)