मानवाधिकार विवाद: अमेरिकी मानव तस्करी रिपोर्ट पर भड़का उत्तर कोरिया, रिपोर्ट को बताया राजनीतिक साजिश

मानवाधिकार विवाद: अमेरिकी रिपोर्ट पर उत्तर कोरिया की तीखी प्रतिक्रिया

(प्योंगयांग): उत्तर कोरिया ने अमेरिका की वर्ष 2026 की मानव तस्करी रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में उत्तर कोरिया को मानव तस्करी रोकने के प्रयासों के मामले में सबसे निचली श्रेणी यानी टियर-3 में रखा गया है। इसके जवाब में उत्तर कोरिया ने रिपोर्ट को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका मानवाधिकारों के मुद्दे का इस्तेमाल उसके खिलाफ दबाव बनाने के लिए कर रहा है।

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह रिपोर्ट देश की छवि खराब करने और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के अनुसार, प्योंगयांग ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए अमेरिका की नीति की आलोचना की है।

लगातार 24वें साल सबसे निचली श्रेणी में उत्तर कोरिया

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी 2026 की ट्रैफिकिंग इन पर्सन्स रिपोर्ट में उत्तर कोरिया को टियर-3 श्रेणी में रखा है। उत्तर कोरिया लगातार 24वें वर्ष इस श्रेणी में शामिल किया गया है।

अमेरिकी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि उत्तर कोरिया में राजनीतिक बंदी शिविरों और श्रम प्रशिक्षण केंद्रों में जबरन मजदूरी कराए जाने की व्यवस्था मौजूद है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार से जुड़े जबरन श्रम से प्राप्त आय का इस्तेमाल सरकारी गतिविधियों के लिए किया जाता है।

रिपोर्ट में विदेशों में काम करने भेजे गए उत्तर कोरियाई श्रमिकों की परिस्थितियों पर भी चिंता जताई गई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कुछ श्रमिकों को अत्यधिक काम करना पड़ता है, उन्हें खतरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है और उनके पासपोर्ट तक उनकी पहुंच सीमित हो सकती है।

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मानवाधिकार विवाद: अमेरिका पर मानवाधिकारों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप

उत्तर कोरिया ने अमेरिकी रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वॉशिंगटन मानवाधिकारों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। प्योंगयांग के अनुसार, ऐसी रिपोर्टों का उद्देश्य दूसरे देशों की संप्रभुता और घरेलू मामलों में हस्तक्षेप को उचित ठहराना है।

उत्तर कोरिया ने यह भी चेतावनी दी कि उसके खिलाफ मानवाधिकारों के मुद्दे पर चलाए जा रहे अभियान को वह अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीति का हिस्सा मानता है। उसने इस तरह की कार्रवाइयों का कड़ा विरोध करने की बात कही है।

अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव बरकरार

मानवाधिकारों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। अमेरिका उत्तर कोरिया में जबरन श्रम और राजनीतिक दमन को लेकर चिंता जताता रहा है, जबकि उत्तर कोरिया ऐसे आरोपों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ कार्रवाई बताता है।

ताजा विवाद से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव फिर चर्चा में आ गया है। फिलहाल उत्तर कोरिया ने रिपोर्ट को खारिज किया है, जबकि अमेरिकी रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के रुख में कोई सहमति दिखाई नहीं देती।

सोर्स: IANS (Indo-Asian News Service)

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