पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में बढ़े डेंगू के मामले
डेंगू के मामले:कोलकाता: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले डेंगू के मामलों में अचानक बढ़ोतरी ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कुछ ग्रामीण और शहरी इलाकों में पिछले एक महीने के दौरान संक्रमण के मामलों में तेजी देखी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है, जहां डेंगू के मामले बढ़ने की वजह से विशेष निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, राज्य की 14 ग्राम पंचायतों और 8 शहरी निकायों को डेंगू प्रभावित हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। इन शहरी निकायों में तीन नगर निगम और पांच नगरपालिकाएं शामिल हैं। त्योहार के नजदीक आने के साथ प्रशासन के सामने संक्रमण को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती बढ़ गई है।
इन जिलों में सामने आए ज्यादा मामले
डेंगू के मामले: डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर जिन जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, उनमें मुर्शिदाबाद, कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली, हावड़ा, मालदा और पूर्व बर्धमान शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डेंगू हॉटस्पॉट के रूप में पहचानी गई 14 ग्राम पंचायतों में से ज्यादातर मुर्शिदाबाद जिले में हैं। इसके अलावा दक्षिण 24 परगना, नदिया, जलपाईगुड़ी, बीरभूम और हुगली जिलों के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में भी संक्रमण बढ़ने की जानकारी सामने आई है।
डेंगू के मामले: शहरी क्षेत्रों में कोलकाता नगर निगम, बिधाननगर नगर निगम और हावड़ा नगर निगम के कुछ वार्डों में भी डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अधिकारियों की नजर इन क्षेत्रों की स्थिति पर बनी हुई है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
सितंबर और अक्टूबर में बढ़ी संक्रमण की रफ्तार
डेंगू के मामले: स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 तक पश्चिम बंगाल में डेंगू के कुल 10,177 मामले दर्ज किए गए थे। पिछले साल इसी अवधि तक राज्य में 12,652 मामले सामने आए थे। इस तुलना के आधार पर इस साल अब तक दर्ज कुल मामले पिछले वर्ष की समान अवधि से कम हैं।
हालांकि, हाल के सप्ताहों में संक्रमण की रफ्तार बढ़ना चिंता का विषय बना हुआ है। सितंबर महीने के दौरान राज्य में डेंगू के 3,948 नए मामले दर्ज किए गए। वहीं, अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही करीब 1,100 नए मामले सामने आए।
डेंगू के मामले: यही वजह है कि कुल मामलों की संख्या पिछले वर्ष से कम होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग हालिया बढ़ोतरी को गंभीरता से ले रहा है। अधिकारियों के लिए अब सबसे अहम चुनौती उन इलाकों में संक्रमण पर नियंत्रण पाना है, जहां कम समय में मरीजों की संख्या बढ़ी है।
दुर्गा पूजा से पहले स्वास्थ्य विभाग सतर्क
डेंगू के मामले: दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का प्रमुख त्योहार है। इस दौरान बाजारों, पूजा पंडालों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में डेंगू के प्रसार को रोकना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर आमतौर पर साफ पानी में जमा लार्वा से पनपते हैं। घरों के आसपास रखे गमलों, कूलर, खुले बर्तनों, छतों और अन्य स्थानों पर जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। इसलिए जलभराव वाले स्थानों की नियमित जांच और सफाई संक्रमण रोकने के अहम उपाय हैं।

डेंगू के मामले: स्वास्थ्य विभाग के लिए हॉटस्पॉट क्षेत्रों में निगरानी, लोगों को जागरूक करने और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने पर ध्यान देना जरूरी है। स्थानीय निकायों और नागरिकों की भागीदारी भी इस अभियान में अहम भूमिका निभा सकती है।
लोगों को सावधानी बरतने की सलाह
डेंगू के मामले: डेंगू से बचाव के लिए लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। पानी की टंकियों और बर्तनों को ढककर रखना, मच्छरदानी या मच्छररोधी उपायों का इस्तेमाल करना और पूरी बांह के कपड़े पहनना उपयोगी सावधानियां हैं।
तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, आंखों के पीछे दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, रक्तस्राव, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। डेंगू की आशंका होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं नहीं लेनी चाहिए।
डेंगू के मामले: फिलहाल पश्चिम बंगाल में डेंगू के कुल मामले पिछले वर्ष की समान अवधि से कम हैं, लेकिन हालिया बढ़ोतरी ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। दुर्गा पूजा से पहले संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर निगरानी और बचाव के उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण रहेगा।