Election Commission: कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य विपक्षी नेताओं ने सोमवार, 12 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित तौर पर हुई अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। विपक्ष इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाता रहा
याचिका दायर करने से पहले राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला। इस प्रदर्शन को ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया गया था। विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच हो और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर कार्रवाई की जाए।
याचिका में कौन-कौन नेता शामिल हैं?
Election Commission: मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (UBT) के संजय राउत, CPI(M) के एमए बेबी, CPI के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी, NCP (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और IUML के ई.टी. मोहम्मद बशीर के नाम शामिल
रिपोर्टों के अनुसार, याचिका में चुनाव आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में उठाए गए सभी कानूनी आधारों और मांगी गई राहत का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
SIR को लेकर क्यों आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग?
Election Commission: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाता सूची की जांच और संशोधन किया जाता है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और अन्य अनियमितताओं से जुड़े सवाल उठे हैं। राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेता इन मुद्दों पर जवाबदेही की मांग कर रहे
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दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया और अपने आदेशों का बचाव किया है। इसलिए मामले में विपक्ष के आरोपों और आयोग के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है। याचिका दायर होना अपने आप में आरोपों के सही साबित होने का प्रमाण नहीं
सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या होगा?
Election Commission: मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, SIR से जुड़े कुछ अन्य मामले भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। विपक्ष की नई याचिका पर आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल, इस मामले का केंद्र मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े सवाल हैं। अदालत में सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि याचिका पर क्या कार्रवाई होती