UNDP Report: पाकिस्तान की 38.3% आबादी बहुआयामी गरीबी से प्रभावित, UNDP रिपोर्ट में खुलासा
(वॉशिंगटन): संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) रिपोर्ट में पाकिस्तान में गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की 38.3 प्रतिशत आबादी बहुआयामी गरीबी से प्रभावित है। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में लोग केवल आर्थिक कठिनाइयों ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ी कई समस्याओं का भी सामना कर रहे।
UNDP के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में बहुआयामी गरीबी से प्रभावित लोगों के बीच वंचना की तीव्रता 51.7 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, देश की 12.9 प्रतिशत आबादी को बहुआयामी गरीबी के प्रति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। ये आंकड़े पाकिस्तान में विकास और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित करते।
क्या कहती है पाकिस्तान की गरीबी रिपोर्ट?
बहुआयामी गरीबी सूचकांक केवल लोगों की आय के आधार पर गरीबी का आकलन नहीं करता। इसमें यह भी देखा जाता है कि लोगों को पर्याप्त पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ पेयजल, बिजली, स्वच्छता और बेहतर आवास जैसी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में शिक्षा से जुड़ी कमियां बहुआयामी गरीबी में सबसे बड़ा योगदान देने वाले कारकों में शामिल हैं। स्वास्थ्य और जीवन स्तर से संबंधित समस्याएं भी लोगों की परिस्थितियों को प्रभावित करती।
इस तरह के आंकड़े बताते हैं कि गरीबी को केवल कम आय के रूप में समझना पर्याप्त नहीं है। कई परिवारों को एक साथ कई बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके जीवन स्तर और विकास के अवसर प्रभावित होते।
UNDP Report: भारत और बांग्लादेश के आंकड़ों से तुलना
UNDP के उपलब्ध आंकड़ों में पाकिस्तान की बहुआयामी गरीबी दर 38.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसकी तुलना में भारत के लिए यह आंकड़ा 16.4 प्रतिशत और बांग्लादेश के लिए 14.9 प्रतिशत है।
हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय एक महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखना जरूरी है। अलग-अलग देशों के लिए इस्तेमाल किए गए घरेलू सर्वेक्षण अलग-अलग वर्षों में किए गए थे। पाकिस्तान का आंकड़ा 2017-18 के सर्वेक्षण पर आधारित है, जबकि भारत का आंकड़ा 2019-21 और बांग्लादेश का 2022 के सर्वेक्षण से संबंधित है। इसलिए ये आंकड़े एक ही समय की परिस्थितियों की सीधी तुलना नहीं करते।
दुनिया में बढ़ी बहुआयामी गरीबी
रिपोर्ट का वैश्विक आकलन भी चिंता बढ़ाने वाला है। UNDP और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) द्वारा जारी 2026 के वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के मुताबिक, दुनिया में लगभग 1.2 अरब लोग बहुआयामी गरीबी में जीवन बिता रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 61.7 करोड़ बच्चे शामिल हैं, जबकि प्रभावित आबादी का 83 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है। वैश्विक स्तर पर बहुआयामी गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या पिछले आकलन की तुलना में 5.15 करोड़ बढ़ी।
UNDP Report: शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत
आंकड़े संकेत देते हैं कि गरीबी कम करने के लिए केवल आय बढ़ाने के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल, उचित आवास और बिजली जैसी सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाना भी जरूरी।
पाकिस्तान के मामले में शिक्षा से जुड़ी वंचना और अन्य बुनियादी जरूरतों की कमी विकास के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट के निष्कर्ष इस बात पर जोर देते हैं कि गरीबी से निपटने के लिए ऐसी नीतियों की आवश्यकता है जो लोगों की कई तरह की समस्याओं को एक साथ संबोधित कर सकें।
सोर्स: ANI (Asian News International), UNDP की Multidimensional Poverty Index रिपोर्ट