अंकिता भंडारी केस: (नई दिल्ली।) अंकिता भंडारी मामले को लेकर दिल्ली में विरोध और न्याय की मांग एक बार फिर चर्चा में है। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए संबंधित नियुक्ति रद्द करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम
अंकिता भंडारी केस: योगिता भयाना ने कहा कि सरकार को 24 घंटे का समय दिया जा रहा है, क्योंकि उनके मुताबिक पहले प्रदर्शनकारियों को भी 24 घंटे की समय-सीमा दी गई थी। उन्होंने कहा कि पहाड़ों से लोग इस गंभीर मामले में न्याय की मांग लेकर आए हैं और आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती।
नियुक्ति रद्द करने की मांग
अंकिता भंडारी केस: सामाजिक कार्यकर्ता ने संबंधित व्यक्ति को राज्यपाल पद पर नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस मामले में जेल की सजा की मांग की जानी चाहिए थी, उससे जुड़े व्यक्ति को राज्यपाल पद से सम्मानित किए जाने जैसा कदम उठाया गया है। उन्होंने सरकार से नियुक्ति वापस लेने की मांग की।
यह बयान योगिता भयाना का आरोप और राजनीतिक नियुक्ति पर उनकी आपत्ति है। नियुक्ति तथा मामले से जुड़े कानूनी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
दुष्यंत के इस्तीफे की मांग
अंकिता भंडारी केस: योगिता भयाना ने अपने बयान में दुष्यंत के इस्तीफे की भी मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उनके अनुसार, यदि 24 घंटे के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।
अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग
अंकिता भंडारी केस: अंकिता भंडारी मामला उत्तराखंड में न्याय और जवाबदेही से जुड़ी एक संवेदनशील घटना है। इस मामले को लेकर समय-समय पर विरोध और सार्वजनिक मांगें सामने आती रही हैं। योगिता भयाना के ताजा बयान में नियुक्ति रद्द करने और इस्तीफे की मांग को आंदोलन की प्रमुख शर्तों के रूप में रखा गया है।
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निष्कर्ष: योगिता भयाना ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए संबंधित नियुक्ति रद्द करने और दुष्यंत के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रहेगा।