डीके शिवकुमार: बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका और सरकार से सवाल पूछने की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र वही है, जहां नागरिकों को सरकार से सवाल करने की आजादी हो। उन्होंने यह बात 17 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के दीक्षांत समारोह में कही।
शिवकुमार का यह संदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जवाबदेही और कानून के महत्व पर केंद्रित रहा। उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों से लोकतंत्र और देश के कानून का सम्मान करने वाले नेतृत्व के निर्माण में योगदान देने की अपेक्षा जताई।
नागरिकों को सवाल पूछने की स्वतंत्रता जरूरी
डीके शिवकुमार: डीके शिवकुमार के बयान का मुख्य संदेश यह था कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है। एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को सरकार के फैसलों पर सवाल उठाने, अपनी राय रखने और सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिलना चाहिए।
सरकार से सवाल पूछना शासन व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ा है। नागरिक जब नीतियों, योजनाओं और सार्वजनिक फैसलों के बारे में सवाल करते हैं, तो इससे प्रशासन को अपने कामकाज और निर्णयों के बारे में जवाब देना पड़ता
डीके शिवकुमार: लोकतंत्र में असहमति और आलोचना को भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। हालांकि, नागरिकों की अभिव्यक्ति और विरोध का अधिकार कानून के दायरे में आता है। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना और किसी फैसले पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक भागीदारी के अहम पहलू
NLSIU के दीक्षांत समारोह में दिया संदेश
डीके शिवकुमार: नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु का 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह 17 अक्टूबर को आयोजित किया गया। इस समारोह में विद्यार्थियों को डिग्रियां और पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम में देश की न्यायपालिका और कानून के क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुईं।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश और NLSIU के चांसलर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में रंगशंकरा की सह-संस्थापक और पद्मश्री से सम्मानित अरुंधति नाग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं और उन्होंने दीक्षांत संबोधन दिया।
डीके शिवकुमार: समारोह में कानून की शिक्षा पूरी कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य, संस्थान की भूमिका और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के महत्व जैसे विषय प्रमुख रहे।
कानून के विद्यार्थियों से नेतृत्व की उम्मीद
डीके शिवकुमार: डीके शिवकुमार ने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों के महत्व को रेखांकित करते हुए उम्मीद जताई कि NLSIU ऐसे नेतृत्व को तैयार करने में योगदान देगा, जो लोकतंत्र को मजबूत करने और कानून का सम्मान करने में भूमिका निभाए।
कानून के विद्यार्थियों के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और नागरिक अधिकारों की समझ महत्वपूर्ण मानी जाती है। भविष्य में इनमें से कई विद्यार्थी वकालत, न्यायिक सेवाओं, प्रशासन, शिक्षा और सार्वजनिक नीति जैसे क्षेत्रों में काम कर सकते
डीके शिवकुमार: ऐसे में कानून की शिक्षा का उद्देश्य केवल कानूनी प्रावधानों को समझना नहीं, बल्कि न्याय, समानता और जवाबदेही जैसे सिद्धांतों के महत्व को समझना भी
लोकतंत्र और जवाबदेही का आपसी संबंध
डीके शिवकुमार: लोकतंत्र में सरकार और नागरिकों के बीच संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नागरिकों को सार्वजनिक नीतियों पर सवाल करने और अपनी चिंताएं व्यक्त करने का अवसर मिलने से शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिल सकता
वहीं, लोकतांत्रिक संस्थाओं और कानून का सम्मान बनाए रखना भी जरूरी है। असहमति को व्यक्त करने के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद कर सकता
डीके शिवकुमार: शिवकुमार का बयान इसी व्यापक चर्चा से जुड़ता है कि लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही और नागरिकों की स्वतंत्रता किस तरह एक-दूसरे से संबंधित
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निष्कर्ष: NLSIU के दीक्षांत समारोह में डीके शिवकुमार ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने की स्वतंत्रता मिलना जरूरी है। उनका संदेश लोकतांत्रिक अधिकारों, कानून के सम्मान और जवाबदेह शासन के महत्व को सामने रखता