नोएडा (उत्तर प्रदेश):- नोएडा में कचरा प्रबंधन को हाईटेक बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। नई व्यवस्था के तहत सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जा रहे स्मार्ट डस्टबिन में विशेष सेंसर लगाए गए हैं, जो कचरे का स्तर लगातार मॉनिटर करेंगे। जैसे ही डस्टबिन लगभग भर जाएगा, इसकी सूचना स्वतः मुख्य कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी, जिसके बाद कचरा उठाने वाली गाड़ी को तुरंत भेजा जाएगा। इससे डस्टबिन के ओवरफ्लो होने और कचरा सड़क पर फैलने की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
कैसे काम करेगी यह सेंसर तकनीक?
स्मार्ट डस्टबिन में आमतौर पर अल्ट्रासोनिक सेंसर (Ultrasonic Sensor) लगाए जाते हैं। यह सेंसर डस्टबिन के अंदर खाली जगह और कचरे के स्तर को मापता है। जब कचरा एक तय सीमा तक पहुंच जाता है, तो सेंसर यह डेटा इंटरनेट आधारित नेटवर्क (IoT) के जरिए केंद्रीय सर्वर या कंट्रोल रूम को भेज देता है।
इसके बाद कंट्रोल रूम की स्क्रीन पर संबंधित डस्टबिन का लोकेशन, भराव स्तर और अलर्ट दिखाई देता है। सिस्टम के जरिए कचरा संग्रहण वाहनों को तुरंत सूचना भेजी जाती है, जिससे समय पर सफाई सुनिश्चित हो सके।
स्मार्ट सिस्टम के फायदे
- डस्टबिन ओवरफ्लो होने से पहले ही सफाई संभव होगी।
- सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी कम होगी।
- दुर्गंध, मच्छरों और संक्रमण के खतरे में कमी आएगी।
- कचरा उठाने वाले वाहनों के रूट और समय का बेहतर प्रबंधन होगा।
- नगर निकाय को रियल-टाइम डेटा मिलने से सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
नोएडा प्राधिकरण का मानना है कि यह तकनीक शहर को अधिक स्वच्छ और स्मार्ट बनाने में मदद करेगी। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में इसे और अधिक क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है। साथ ही यह पहल स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को भी मजबूती देगी।