Janmoni Kunwar: बाढ़ में उजड़ा घर, टेंट में रहने को मजबूर परिवार; 17 साल की जनमोनी ने नेशनल कराटे चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

Janmoni Kunwar Karate Gold :- असम की 17 वर्षीय जनमोनी कोंवर ने मुश्किल हालात के बीच ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गया है। बाढ़ में घर और आजीविका गंवाने के बाद जनमोनी का परिवार टारपॉलिन से बने अस्थायी टेंट में रहने को मजबूर है। इसी संघर्ष के बीच जनमोनी ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत लिया।

बाढ़ ने छीन लिया घर और आजीविका

जनमोनी असम के जोरहाट जिले के भोगदोइपोरिया गांव की रहने वाली हैं। जुलाई में आई भीषण बाढ़ के कारण उनका घर पानी में डूब गया। परिवार की मछली पालन की व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई और उनके पशु-पक्षियों को भी नुकसान उठाना पड़ा।

 

घर उजड़ने के बाद परिवार को बांध पर टारपॉलिन के नीचे अस्थायी रूप से रहना पड़ रहा है। परिवार के मुताबिक, उनके पास अभी वापस लौटने के लिए सुरक्षित घर नहीं है।

 

कराटे प्रतियोगिता में जाना भी हुआ मुश्किल

 

जनमोनी बचपन से ही कराटे सीख रही हैं। उन्होंने महज पांच वर्ष की उम्र में प्रशिक्षण शुरू किया था। इससे पहले भी वह प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं।

 

इस बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए परिवार ने मछली बेचकर यात्रा का खर्च जुटाने की योजना बनाई थी, लेकिन बाढ़ ने उनकी इस योजना को भी बर्बाद कर दिया। परिवार पहले ही जनमोनी के खेल करियर के लिए अपनी दो भैंसें बेच चुका था।

 

मदद मिली तो दिल्ली पहुंची जनमोनी

 

जनमोनी की स्थिति की जानकारी सामने आने के बाद उनकी मदद के लिए फिजिक्स वाला के संस्थापक अलख पांडेय आगे आए। उन्होंने प्रतियोगिता में जाने और वापस लौटने की यात्रा तथा रहने की व्यवस्था में मदद की। साथ ही परिवार को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी।

 

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने भी परिवार को 10 हजार रुपये की सहायता दी। इसके बाद जनमोनी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच सकीं।

 

टॉकाटोरा स्टेडियम में जीता स्वर्ण पदक

 

दिल्ली के टॉकाटोरा इंडोर स्टेडियम में 7 से 9 अगस्त तक आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप में जनमोनी ने अशीहारा कराटे वर्ग में हिस्सा लिया। उन्होंने अपने मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। रिपोर्ट के अनुसार, फाइनल मुकाबले में उन्होंने 10-2 से जीत दर्ज की।

 

जीत के बाद भी टेंट ही है घर

 

जनमोनी जब स्वर्ण पदक जीतकर असम लौटीं तो उनके सामने एक भावुक तस्वीर थी। एक तरफ हाथ में राष्ट्रीय स्तर का स्वर्ण पदक था, तो दूसरी तरफ परिवार के लिए अभी भी अपना घर नहीं है।

 

जनमोनी का परिवार फिलहाल उसी अस्थायी टेंट में रह रहा है। परिवार का अनुमान है कि उन्हें नवंबर तक वहीं रहना पड़ सकता है।

 

संघर्ष के बीच जारी रखा अभ्यास

 

सबसे खास बात यह है कि घर और प्रशिक्षण की सुविधाएं छिन जाने के बावजूद जनमोनी ने कराटे का अभ्यास नहीं छोड़ा। परिवार के साथ बांध पर रहते हुए भी उन्होंने अपना प्रशिक्षण जारी रखा और राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी की।

 

जनमोनी फिलहाल कक्षा 12 की छात्रा हैं और आगे भी कराटे में अपना करियर जारी रखना चाहती हैं। उनकी यह उपलब्धि बताती है कि कठिन परिस्थितियां सपनों के रास्ते में बाधा जरूर बन सकती हैं, लेकिन मजबूत इरादों वाले व्यक्ति को रोकना आसान नहीं होता।

 

 

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