100 प्रतिशत इथेनॉल पर दौड़ेगी मारुति की नई कार, पर्यावरण दिवस पर बड़ा ऐलान कर सकते हैं नितिन गडकरी

नई दिल्ली :- केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी Gadkari ने घोषणा की है कि Maruti Suzuki 5 जून यानी विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत की पहली 100 प्रतिशत इथेनॉल यानी E100 पर चलने वाली फ्लेक्स फ्यूल कार लॉन्च करने जा रही है। यह कदम भारत में हरित ईंधन और पेट्रोल डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

नितिन गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि जीवाश्म ईंधन भारत के प्रदूषण और आयात बिल की सबसे बड़ी वजह है। उन्होंने बताया कि देश की लगभग 87 प्रतिशत पेट्रोल डीजल और गैस जरूरतें आयात से पूरी होती हैं इसलिए इथेनॉल जैसे स्वदेशी और सस्ते ईंधन को बढ़ावा देना जरूरी है।

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक मारुति सुजुकी की यह नई फ्लेक्स फ्यूल कार 100 प्रतिशत इथेनॉल यानी E100 पर चल सकेगी। फिलहाल माना जा रहा है कि कंपनी अपनी लोकप्रिय कार WagonR या Fronx के फ्लेक्स फ्यूल वर्जन को पेश कर सकती है हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर मॉडल का नाम घोषित नहीं किया है।

 

फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली कारें पेट्रोल और इथेनॉल के अलग अलग मिश्रण पर चल सकती हैं। इनमें खास तरह का इंजन और फ्यूल सिस्टम लगाया जाता है जो ईंधन के मिश्रण के अनुसार खुद को एडजस्ट कर लेता है। इससे पेट्रोल की खपत कम होती है और प्रदूषण भी घटता है।

 

सरकार पिछले कुछ वर्षों से इथेनॉल ब्लेंडिंग को तेजी से बढ़ावा दे रही है। भारत पहले ही E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की दिशा में आगे बढ़ चुका है। अब E100 जैसे शुद्ध इथेनॉल ईंधन के लिए नियम और प्रमाणन प्रक्रिया भी तैयार की जा रही है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल आधारित वाहनों से किसानों को भी फायदा हो सकता है क्योंकि इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इससे कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और विदेशी तेल आयात पर खर्च कम हो सकता है।

 

हालांकि फिलहाल देशभर में E100 फ्यूल पंप और सप्लाई नेटवर्क बहुत सीमित है। मारुति सुजुकी के अधिकारियों ने भी माना है कि शुरुआती दौर में ऐसे वाहनों की बिक्री सीमित रह सकती है क्योंकि पूरे देश में इथेनॉल उपलब्ध कराने का ढांचा तैयार होने में समय लगेगा। अगर यह लॉन्च सफल रहता है तो भारत में फ्लेक्स फ्यूल कारों का नया दौर शुरू हो सकता है। Toyota Tata Motors और Mahindra & Mahindra जैसी कंपनियां भी इस तकनीक पर काम कर रही हैं।

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