कीव :- रूस ने हाल ही में यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमला किया, जिसमें Oreshnik missile के इस्तेमाल की रिपोर्ट सामने आई है। इस हमले ने एक बार फिर दुनिया भर में हाइपरसोनिक हथियारों और MIRV तकनीक को लेकर बहस तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में सैकड़ों ड्रोन और कई प्रकार की मिसाइलें दागी गईं, जिनका लक्ष्य कीव और उसके आसपास के क्षेत्र थे। हमले में नागरिक ढांचे, बाजारों और कुछ सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचने की भी खबर है। यूक्रेनी अधिकारियों ने इसे अब तक के सबसे बड़े हालिया हमलों में से एक बताया है।
ओरेश्निक मिसाइल क्या है
ओरेश्निक रूस की एक नई पीढ़ी की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जिसे हाइपरसोनिक गति यानी ध्वनि की गति से कई गुना तेज उड़ने में सक्षम बताया जाता है। इसमें MIRV तकनीक का इस्तेमाल हो सकता है, जिसके तहत एक ही मिसाइल से कई स्वतंत्र वारहेड अलग-अलग लक्ष्यों पर गिराए जा सकते हैं। इस तकनीक की वजह से यह मिसाइल पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद कठिन चुनौती बन जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी तेज गति, ऊंचाई पर उड़ान और कई वारहेड क्षमता इसे आधुनिक युद्ध तकनीक में एक अत्यंत खतरनाक हथियार बनाती है।
MIRV और हाइपरसोनिक तकनीक क्यों चर्चा में है
MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicle) तकनीक का मतलब है कि एक ही मिसाइल कई वारहेड ले जा सकती है और अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकती है। इससे रक्षा प्रणाली के लिए इसे रोकना और भी मुश्किल हो जाता है।हाइपरसोनिक हथियार 5 मैक (ध्वनि की गति से 5 गुना) से अधिक गति से चलते हैं और उड़ान के दौरान दिशा बदल सकते हैं, जिससे इन्हें ट्रैक और इंटरसेप्ट करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यही कारण है कि इन हथियारों को लेकर वैश्विक सैन्य रणनीति में नई चिंता पैदा हो गई है।
वैश्विक तनाव और रणनीतिक असर
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे हथियारों का इस्तेमाल केवल युद्ध नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव का भी हिस्सा होता है। रूस और पश्चिमी देशों के बीच जारी तनाव के बीच ओरेश्निक जैसे हथियारों की तैनाती ने सुरक्षा विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है।यूक्रेन युद्ध में लगातार हो रहे बड़े हवाई हमलों से यह स्पष्ट है कि आधुनिक युद्ध अब अधिक तकनीकी और तीव्र गति वाला होता जा रहा है, जहां पारंपरिक रक्षा प्रणालियां लगातार चुनौती का सामना कर रही हैं।फिलहाल इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है और हाइपरसोनिक हथियारों पर नियंत्रण और संतुलन को लेकर बहस और गहरी होती जा रही है।