मजदूर पिता के बेटे ने रचा इतिहास, विश्व योगासन चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर बिहार का बढ़ाया मान

 

बेतिया। पश्चिम चंपारण के एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले सारांश कुमार ने विश्व योगासन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर बिहार और देश का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सारांश की इस उपलब्धि ने लाखों युवाओं को प्रेरणा दी है।

भवानीपुर गांव निवासी सारांश कुमार एक मजदूर परिवार से आते हैं। उनके पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद सारांश ने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। लगातार अभ्यास, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने योगासन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

अहमदाबाद में 4 से 8 जून के बीच आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप 2026 में दुनिया के 78 देशों के 500 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच सारांश कुमार ने रिदमिक पेयर स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

भारतीय टीम ने भी इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया और कुल 114 पदक जीतकर पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। भारत के इस स्वर्णिम अभियान में सारांश का योगदान विशेष रूप से सराहा जा रहा है।

सारांश की सफलता पर उनके परिजनों, प्रशिक्षकों और स्कूल में खुशी का माहौल है। प्रशिक्षकों का कहना है कि उनकी मेहनत, लगन और समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।

सारांश कुमार की यह सफलता न केवल पश्चिम चंपारण बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय बन गई है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।

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