नई दिल्ली। भारत की बढ़ती पर्वतीय युद्ध (माउंटेन वारफेयर) क्षमताओं के बीच बेल्जियम की रक्षा कंपनी John Cockerill ने भारतीय सेना को अपने उन्नत 105 मिमी टैंक टरेट की पेशकश की है। कंपनी का दावा है कि यह आधुनिक टरेट सिस्टम दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात हल्के टैंकों की मारक क्षमता और गतिशीलता को काफी बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर मौजूद पर्वतीय चुनौतियों को देखते हुए सेना लंबे समय से ऐसे हल्के लेकिन शक्तिशाली हथियार प्लेटफॉर्म की तलाश में है, जिन्हें कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में आसानी से तैनात किया जा सके। ऐसे में जॉन कॉकरिल का 105 मिमी टरेट भारतीय सेना की आवश्यकताओं के अनुरूप माना जा रहा है।
कंपनी ने संकेत दिया है कि यदि भारत इस प्रस्ताव में रुचि दिखाता है तो तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) और भारत में निर्माण (Make in India) जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। इससे न केवल सेना को आधुनिक उपकरण मिलेंगे, बल्कि देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी बढ़ावा मिल सकता है।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बढ़ती सामरिक चुनौतियों के मद्देनजर भारतीय सेना अपनी पर्वतीय युद्ध क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है। हाल के वर्षों में सेना ने हल्के टैंक, ड्रोन, अत्याधुनिक तोपखाने और निगरानी प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया है।
105 मिमी टरेट अपनी उच्च फायरपावर, सटीकता और कम वजन के कारण पर्वतीय इलाकों के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसे हल्के टैंक प्लेटफॉर्म पर लगाया जा सकता है, जिससे दुर्गम क्षेत्रों में तेजी से तैनाती और संचालन संभव हो जाता है।
हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय भारतीय रक्षा मंत्रालय और सेना की तकनीकी एवं सामरिक आवश्यकताओं के मूल्यांकन के बाद ही लिया जाएगा। यदि यह सौदा आगे बढ़ता है, तो यह भारत की पर्वतीय रक्षा क्षमता को और अधिक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।