नई दिल्ली :- देश में महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों और कारोबारियों को एक और झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। नई दरों के अनुसार दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3113.50 रुपये हो गई है, जबकि कोलकाता में इसकी कीमत 3255.50 रुपये तक पहुंच गई है।
तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी संशोधित दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं कोलकाता में यह बढ़ोतरी 53 रुपये तक दर्ज की गई है। नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
कमर्शियल LPG सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं और छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर खाद्य व्यवसायों की लागत पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो खाने-पीने की वस्तुओं और रेस्तरां सेवाओं के दामों पर भी असर देखने को मिल सकता है।
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताओं को भी ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में पेट्रोल, डीजल और अब कमर्शियल LPG के दामों में बढ़ोतरी हुई है।
व्यापारिक संगठनों और होटल उद्योग से जुड़े लोगों ने गैस कीमतों में हुई वृद्धि पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले से बढ़ती परिचालन लागत के बीच LPG की कीमत बढ़ने से छोटे व्यवसायों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। कई कारोबारियों का मानना है कि यदि लागत लगातार बढ़ती रही तो उन्हें उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह बढ़ोतरी केवल 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर पर लागू की गई है। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कमर्शियल गैस महंगी होने का असर अप्रत्यक्ष रूप से आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि ईंधन और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई दर को प्रभावित कर सकती हैं। परिवहन, खाद्य सेवाओं और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका बनी हुई है। फिलहाल नई कीमतें लागू हो चुकी हैं और कारोबारियों की नजर अब आने वाले महीनों में ऊर्जा बाजार की स्थिति और सरकारी नीतियों पर बनी हुई है।