नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर दिए गए हालिया बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार देशभर के करोड़ों वाहन चालकों पर बिना पर्याप्त निष्कर्ष के एक बड़ा प्रयोग कर रही है।
कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि E20 ईंधन नीति को लागू करने से पहले उसके सभी प्रभावों का व्यापक अध्ययन होना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग भी की।
वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को गन्ने और अन्य फसलों से अतिरिक्त आय मिलेगी तथा प्रदूषण में भी कमी आएगी। सरकार भविष्य में अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के उपयोग की दिशा में भी काम कर रही है।
हालांकि, इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नए वाहनों के लिए E20 उपयुक्त हो सकता है, जबकि पुराने वाहनों के मालिकों को वाहन निर्माता कंपनियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।
इथेनॉल नीति को लेकर राजनीतिक और तकनीकी बहस जारी है। आने वाले समय में सरकार और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर इस नीति के प्रभावों की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।