होर्मुज़ में अमेरिका-ईरान फिर आमने-सामने, सऊदी पर हूती हमले से भारत की बढ़ी चिंता

  1. Hormuz Strait (नई दिल्ली): पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य टकराव तथा सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हूती हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं ।

Hormuz Strait होर्मुज़ में बढ़ा तनाव, तेल टैंकर बने निशाना

अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है, जिसके बाद ईरान की ओर से भी समुद्री इलाकों में जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। रॉयटर्स के अनुसार, होर्मुज़ से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की संख्या भी सामान्य स्तर से काफी नीचे आ गई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।

Hormuz Strait सऊदी के ऊर्जा ठिकानों पर हूती हमला

इसी बीच ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है। हमलों के बाद सऊदी अरब ने यमन में जवाबी कार्रवाई भी की है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

Hormuz Strait भारत के लिए क्यों बढ़ सकती हैं मुश्किलें?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। खासतौर पर LPG के मामले में होर्मुज़ बेहद अहम है। भारत अपनी LPG खपत का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है और इस आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सामान्य परिस्थितियों में होर्मुज़ से होकर आता है।

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अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहा और समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई, तो कच्चे तेल और LPG की ढुलाई महंगी हो सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल, परिवहन और कई अन्य वस्तुओं की लागत बढ़ने का दबाव बन सकता है। हालांकि भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए स्रोतों और मार्गों में विविधता बढ़ाई है। हाल के महीनों में अमेरिका भारत के LPG आयात का बड़ा स्रोत बनकर उभरा है।विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि होर्मुज़ में तनाव कितने समय तक बना रहता है। अगर समुद्री आपूर्ति बाधित हुई तो इसका असर केवल तेल बाजार पर नहीं, बल्कि वैश्विक महंगाई और आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।

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