काशी वडनगर यात्रा वाराणसी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित काशी-वडनगर यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिली है। मुख्यमंत्री ने योग और कुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं को दुनिया के मंच पर नई पहचान मिली है।
काशी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 दिवसीय ‘काशी-वडनगर’ युवा बाइक यात्रा का शुभारंभ किया। यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान वडनगर और उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी को जोड़ने की पहल है। इस अभियान में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए हैं।

काशी वडनगर यात्रा:- मुख्यमंत्री के अनुसार, यात्रा के दौरान प्रतिभागी प्रतिदिन करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे और अलग-अलग राज्यों में प्रतिदिन चार सामुदायिक संपर्क एवं सेवा गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान युवाओं को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने और समाजसेवा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का संदेश देने का अवसर प्रदान करेगा।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को पिछले दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली है। उन्होंने योग को वैश्विक मंच पर मिली मान्यता और कुंभ मेले को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने को प्रमुख उदाहरणों के तौर पर प्रस्तुत किया।
काशी वडनगर यात्रा:- कार्यक्रम में काशी और वडनगर के बीच आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। गुजरात की दस पवित्र नदियों का जल वडनगर के हाटकेश्वर महादेव मंदिर से काशी लाया जाएगा, जबकि काशी की दस पवित्र नदियों का जल काशी विश्वनाथ मंदिर से वडनगर ले जाया जाएगा। इस आदान-प्रदान को भारत की सांस्कृतिक एकता और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना से जोड़ा गया।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। इससे पहले नेताओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना भी की।
काशी वडनगर यात्रा:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रा को ‘विरासत और विकास’ की भावना से जोड़ते हुए कहा कि यह अभियान युवाओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय एकता से जोड़ने का माध्यम बनेगा। 20 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 7 अक्टूबर को समाप्त होगी।